ऑन-डा-पेज सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन – II

This article is a part of Digital Marketing in Hindi series on Viral Patrika. This covers details of on-the-page Search Engine Optimization in Hindi. This is the second part of On-The-Page S.E.O. The first part of basics of On-The-Page Search Engine Optimization in Hindi introduces the concept. This part will explain it in further detail.

नमस्कार। आपका ऑन -डा -पेज सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के दुसरे अध्याय में स्वागत है। ऑन – डा -पेज याने की आपके वेबपेज पर होने वाले अनुकूलन कार्यों में निम्नलिखित महत्वपूर्ण कारक हैं| हमने पहले पाठ में कुछ मूल बातें ऑन द पेज सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन की देखी| इस आर्टिकल में हम ऑन द वे सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के बारे में थोड़ा और विस्तार से चर्चा करेंगे|

1. टाइटल टैग (शीर्षक टैग )

टाइटल टैग वह तत्त्व है जो आपके वेबपेज का टाइटल या शीर्षक बताता है |

टाइटल टैग या शीर्षक टैग सर्च इंजन परिणाम पृष्ठों पर किसी दिए गए परिणाम के लिए क्लिक करने योग्य शीर्षक के रूप में दिखाए जाते हैं। यह टैग एक वेबपेज की प्रयोज्यता, सोशल मीडिआ पर शेयर और सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के लिए महत्वपूर्ण हैं।

नीचे हम दैनिक जागरण के उदहारण के ज़रिये यह समझने की कोशिश करेंगेग की टाइटल टैग का Google सर्च में क्या महत्व है। जो भी नीले रंग में लिखा है (इस उदहारण में दैनिक जागरण ) और जिसे क्लिक किया जा सकता है वह टाइटल टैग में उल्लेखित होता है.

Title Tag - search engine optimization in hindi

Google आमतौर पर शीर्षक टैग के पहले 50-60 वर्ण दिखाता है।यदि आप अपने शीर्षक को 60 अक्षरों से कम रखते हैं, तो हमारा शोध बताता है कि आप अपने शीर्षकों के बारे में 90% से ठीक से प्रदर्शित होने की उम्मीद कर सकते हैं।

यह कोड आखिर दीखता कैसा है ? नीचे इसका एक उदहारण देखते है।

<head>
<title>दैनिक जागरण </title>
</head>

दैनिक जागरण ने निम्नलिखित कोड को अपने HTML में डाल दिया होगा। इसी वजह से उनके सर्च रिजल्ट में नीले रंग में “दैनिक जागरण” लिखा है।

टाइटल टैग क्यों महत्वपूर्ण हैं? टाइटल टैग सर्च इंजन को आपके वेबपेज के बारे में समझने में सहायता करने में एक प्रमुख कारक हैं, और वे आपके वेबपेज के अधिकांश लोगों की पहली छाप हैं। टाइटल टैग तीन प्रमुख स्थानों में उपयोग किया जाता है:

  1. सर्च इंजन परिणाम पृष्ठ (सर्च इंजन रिजल्ट पेज): आपका टाइटल टैग निर्धारित करता है (कुछ अपवादों के साथ) की सर्च इंजन परिणाम पृष्ठ में किसी व्यक्ति का का आपकी साइट से पहला अनुभव कैसा है। यहां तक ​​कि अगर आपकी साइट अच्छी तरह से रैंक करती है, तो एक अच्छा शीर्षक यह निर्धारित करने में मेक-या-ब्रेक फैक्टर हो सकता है – कि कोई व्यक्ति आपके लिंक पर क्लिक करता है या नहीं।
  2. वेब ब्राउज़र : आपका शीर्षक टैग आपके वेब ब्राउज़र के शीर्ष पर प्रदर्शित होता है और प्लेसहोल्डर के रूप में कार्य करता है |एक टाइटल टैग में शुरू में महत्वपूर्ण कीवर्ड (खोजशब्दों) के साथ आप यह सुनिष्चित कर सकते हैं की लोग आपकी साइट को आराम से पहचान पाएं।
  3. सोशल नेटवर्क जैसे फेसबुक और ट्विटर: सोशल नेटवर्क आपके टाइटल टैग का उपयोग यह निर्धारित करने के लिए करेंगे कि जब आप आपका वेबपेज को शेयर किया जाता है तो क्या प्रदर्शित होगा। एक अच्छा टाइटल टैग यह सुनिष्चित करेगा की आपकी वेबसाइट को लोग सोशल मीडिया पर पहचाने और उस पर क्लिक करके आपकी वेबसाइट पर आएं।

2. मेटा विवरण (Meta Description)

मेटा विवरण HTML का वह गुण हैं जो वेबपेज के संक्षिप्त सारांश प्रदान करते हैं। वे आमतौर पर सर्च इंजन परिणाम पृष्ठ में नीले क्लिक करने योग्य लिंक के नीचे दिखाई देते हैं। आइए फिर से दैनिक जागरण का उदाहरण लेते है।

Meta Tag - Digital Marketing in Hindi Series by viral patrika

बॉक्स में दी गई जानकारी आमतौर पर किसी वेब पेज के मेटा टैग में निर्दिष्ट होती है | अब एक HTML में मेटा टैग के कोड को देखें |

<head>
<meta name=”description” content=”यह मेटा टैग का उदहारण है और यहां पे लिखी हुई लाइन सर्च रिजल्ट में दिखती हैं”>
</head>

मेटा विवरण (या डिस्क्रिप्शन) किसी भी लम्बाई हो सकता है, लेकिन सर्च इंजन आमतौर पर 160 अक्षर से अधिक अक्षरों को छोटा करते हैं। मेटा विवरण (या डिस्क्रिप्शन) को लंबे समय तक रखें और अपने वेबपेज का पर्याप्त रूप से विवरण करें, लेकिन 160-वर्ण सीमा से कम।

3. ऑल्ट टैग – Alt Text (वैकल्पिक शब्द)

ऑल्ट टैग या ऑल्ट टेक्स्ट या वैकल्पिक शभ्द एक पृष्ठ (वेबपेज) पर एक इमेज या फोटो (तस्वीर) का वर्णन करने के लिए एक HTML कोड के भीतर उपयोग किया जाता है।

यह आपके वेबपेज पर डाली गयी तस्वीरों का बेहतर विवरण करते हैं। अगर किसी कारन वर्ष आपकी इमेज लोड नहीं हो पाती तो आपकी फोटो की जगह यह शब्द दिखाएं जायेंगे।

सर्च इंजन इमेज सर्च के लिए और आपके वेबसाइट पर बेहतर जानकारी के लिए इनका उपयोग करते हैं। चलो एक उदाहरण लेते हैं इसके HTML कोड का।

<img src=”tastyfood.gif” alt=”स्वादिष्ट भोजन”>

यह ऊपर दिए गए उदहारण में हमने एक इमेज टैग डाला है। इस टैग की वजह से आपके वेबपेज पर एक तस्वीर या फोटो दिखती है। इस उदहारण में यह तस्वीर एक स्वादिश्ट खाने की है। हमने उसके आगे ऑल्ट टैग डालके इस फोटो की ज़यादि जानकारी दी। अब सर्च इंजन को यह पता लग पायेगा की यह तस्वीर एक स्वादिष्ट खाने की है और इस वेबपेज पर स्वादिश्ट खाने के बारे में लिखा हुआ है।

डुप्लीकेट कंटेंट (Duplicate Content)

वह कंटेंट है जो कि इंटरनेट पर एक से ज्यादा जगह पर मौजूद होता है | इस विषय में जगह का तात्पर्य है कि वहकंटेंट एक अलग लिंक पर इंटरनेट पर मौजूद हो| अगर आपकी वेबसाइट पर डुप्लीकेट कंटेंट है या फिर आपने अपनी वेबसाइट या वेब पेज पर किसी और वेबसाइट का कंटेंट उठाया है तो इसका आपकी सर्च इंजन रैंकिंग पर नेगेटिव इंपेक्ट पड़ता है| सर्च इंजन जैसे कि Google एक ही कंटेंट को बार बार अपने सर्च रिजल्ट में शायद ना दिखाएं| गूगल और अन्य सर्च इंजिंस को यह पता करने में भी दिक्कत होती है कि कौन सी वेबसाइट को दिखाया जाए उसी कंटेंट के लिए कौन सी वेबसाइट को नहीं दिखाया जाए| इन्हीं वजहों से आपकी वेबसाइट की लिंक की क्वालिटी कम हो सकती है और यह सर्च रिजल्ट में शायद नीचे है| अगर आपकी वेबसाइट पर कंटेंट कॉपी किया गया है तो इस से आपका शायद नुकसान हो सकता है| s u के लिए जरूरी है कि आपकी वेबसाइट पर अलग और अच्छा कंटेंट मौजूद हो | अगर आपकी अपनी ही वेबसाइट पर कहीं जगह पर वही चीज़ मौजूद है तो बेहतर यह है कि आप डुप्लीकेट कंटेंट को ओरिजिनल कंटेंट की तरफ रीडायरेक्ट करें| इसको 301 डायरेक्ट भी कहते हैं |

डोमेन (Domain)

डोमेन आखिर है क्या और इसका परत सर्च इंजन की रिजल्ट में कैसे पड़ता है?

डोमिन एक अनोखा आराम से पढ़े जाने वाला वेबसाइट का पता होता है|डोमेन आपकी वेबसाइट का पता है| हर वेबसाइट का पता फर्क होता है| इसी वजह से आपकी वेबसाइट का डोमेन नेम बहुत ही महत्वपूर्ण है| गूगल और अन्य सर्च इंजन डोमेन के नाम में दिए गए कीवर्ड्स का इस्तेमाल करता है यह जानकारी प्राप्त करने के लिए किए वेबसाइट किंकी वर्ड के सर्च रिजल्ट में दिखानी चाहिए| इसलिए जब भी आप अपनी वेबसाइट का डोमेन खरीदें तो उसे बड़े ध्यान से खरीदें| उदाहरण लेते हैं एक वेबसाइट जिसका नाम है DelhiKiSaree.com और दूसरी वेबसाइट जिसका नाम है Saree.com| जब भी कोई व्यक्ति दिल्ली की साड़ी सर्च करेगा तो दिल्ली की साड़ी डॉट कॉम का सर्च रिजल्ट में ऊपर आने की संभावना ज्यादा है

इसके 3 हिस्से होते हैं| पहले हिस्से को कहते हैं टॉप लेवल डोमेन यानी चोटी के स्तर का डोमेन| यह डॉट कॉम डॉट इन जैसा दिखता है| दूसरा होता है डोमेन नेम जो कि आसानी से समझ में आने वाला नाम होता है| एक उदाहरण ले तू google.com में डॉट कॉम टॉप लेवल डोमेन है और Google डोमेन नेम है| तीसरा होता है सब डोमेन|

http://news.google.com/
news- सब्डोमैन
Google – डोमेन
.com – टॉप लेवल डोमेन

आपकी वेबसाइट में सबसे जरूरी रुट डोमेन होता है | उदाहरण के तौर पर google.com एक रुप डोमेन है| news.google.com एक सबडोमेन है| सर्च इंजन रूट डोमेन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं|  अपना डोमेन नेम आसान और यादगार बनाई है क्योंकि यह आपकी वेबसाइट का सबसे महत्वपूर्ण अंग है| यह ना ज्यादा लंबा ना छोटा होना चाहिए और कोशिश करिए कि इसमें जबरदस्ती कीवर्ड ना घुसाए जाए|

यूनिफार्म रिसोर्स लोकेटर – URL (Uniform Resource Locator)

वेबसाइट का लिंक या एक वेब पेज का लिंक एक एड्रेस या पता होता है जो हर वेबपेज के लिए अद्वितीय होता है| नीचे हमने कुछ उदाहरण दिए हैं URL के

https://www.jagran.com/
https://www.jagran.com/state/uttar-pradesh
https://www.jagran.com/latest-news.html

यह एक ही डोमेन के अलग-अलग URL है| URL को यूनिफार्म रिसोर्स लोकेटर भी कहते हैं| इसे एक वेब एड्रेस भी कहते हैं| सभी ब्राउज़रों में सही ढंग से प्रस्तुत करने के लिए, URL 2,083 वर्णों से कम होना चाहिए। एक यूआरएल मानव-पठनीय पाठ है, जो कि संख्याओं (आईपी पते) को बदलने के लिए डिज़ाइन किया गया था जो कि कंप्यूटर सर्वरों के साथ संवाद करने के लिए उपयोग करते हैं।

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