लिंक बिल्डिंग – Link Building

नमस्कार| आपका डिजिटल मार्केटिंग की हिंदी सीरीज में फिर से स्वागत है| In this post learn more about link building in Hindi. This post is a part of Digital marketing in Hindi series by Viral Patrika.

लिंक बिल्डिंग सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन का एक बहुत ही महत्वपूर्ण अंग है और यह ऑफ-साइट सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन में आता है|

लिंक्स सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है| इस पोस्ट में हम चर्चा करेंगे लिंक बिल्डिंग के बारे में| सरल भाषा में लिंक बिल्डिंग अपने वेबसाइट के लिंक बनाने का तरीका है जिससे आपकी वेबसाइट गूगल सर्च या अन्य सर्च इंजनों के अनुकूल बनेगी| इसमें दो तरह के लिंक आते हैं
पहला है इंटरनल जाने की वह लिंक जो आपकी वेबसाइट पर मौजूद होते हैं और आपकी वेबसाइट पर अन्य व्यक्ति जिस की तरफ इशारा करते हैं| दूसरे होते हैं एक्सटर्नल जो कि आपकी वेबसाइट पर किसी दूसरी वेबसाइट की ओर इशारा करते हैं|

इंटरनेट लिंक (Internal Link) – इंटरनल लिंक्स ऐसे लिंक होते हैं जो एक डोमेन पर एक पेज से एक ही डोमेन पर किसी अन्य पेज पर जाते हैं। वे आमतौर पर मुख्य नेविगेशन में उपयोग किया जाता है।

नीचे हमने एक उदाहरण दिया है इंटरनल लिंक का| जो लिंक मुख्य नेविगेशन में लाल रंग से दिखाए गए हैं वह लिंक viralpatrika.com पर ही एक अन्य पेज खोलते हैं| क्योंकि यह पेज आप को viralpatrika.com पर ही रखते हैं, इसी वजह से इनको इंटरनल लिंक बोलते हैं|

Internal Links - Digital Marketing in hindi series.

इंटरनल लिंग के 3 फायदे होते हैं

  • वे उपयोगकर्ताओं को एक वेबसाइट पर नेविगेट करने की अनुमति देते हैं |
  • वे दिए गए वेबसाइट के लिए सूचना पदानुक्रम को स्थापित करने में सहायता करते हैं।
  • वे वेबसाइटों के आसपास लिंक का रस (रैंकिंग पावर) फैलाने में मदद करते हैं

एक्सटर्नल लिंक (External Link) – एक्सटर्नल लिंक वह लिंक होते हैं जो आपके डोमेन के अलावा किसी और डोमेन पर यूजर को भेजते हैं| मान लीजिए की वायरल patrika.com पर हमने दैनिक jagran.com का एक लिंक दिया तो उसे एक्सटर्नल लिंक कहेंगे| यह लिंक एक यूजर को आपकी वेबसाइट के बाहर ले जाते हैं| ऐसे ही अन्य वेबसाइट पर अगर आपकी वेबसाइट का लिंक होगा तो वह और अन्य वेब साइट्स के लिए एक्सटर्नल लिंक है और आप के लिए बैक लिंक है|

सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन विशेषज्ञों का मानना ​​है कि बाहरी लिंक रैंकिंग शक्ति का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत हैं
यह इंटरनल लिंक से भी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है किसी भी वेब पेज के लिए| अगर कोई प्रभावशाली वेबसाइट आपकी वेबसाइट को एक एक्सटर्नल लिंक देती है तो इससे आपकी वेबसाइट को सर्च इंजन रिजल्ट में ऊपर आने में बहुत फायदा होगा| सर्च इंजन इन को एक वोट की तरह भी मानते हैं| अगर ज्यादा व्यक्ति आप को वोट देंगे तो आपकी सर्च इंजन में रैंक बढ़ेगी| सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के नजरिए से देखा जाए तो ज्यादा वोट का मतलब है कि ज्यादा बैक लिंक | तो अगर ज्यादा वेबसाइट आप को वोट देती हैं या फिर ज्यादा महत्वपूर्ण वेबसाइट आपको वोट देती है ( जाने के बैकलिंक देती है) इस से आपकी वेबसाइट सर्च इंजन के रिजल्ट में ऊपर आएगी| इससे आप की वेबसाइट Google पर आने वाले हजारों लोगों के सर्च किए गए कीवर्ड के सर्च रिजल्ट में ऊपर आएगी इसका मतलब है आप की वेबसाइट पर ज्यादा से ज्यादा ट्रैफिक फ्री में आएगा|
आपको अपनी वेबसाइट के लिए लिंक बनाते रहना जरूरी है| जो लिंक एक समय पर लोकप्रिय या पॉपुलर थे मैं अब इतने ताज़ा ना हो| इसी वजह से शायद कम लोग उन लिंक पर क्लिक करके आपकी वेबसाइट पर आएं| इसी वजह से एक्सटर्नल लिंक समय-समय पर बनाते रहना बहुत जरूरी है|

एंकर टेक्स्ट (Anchor text) – एंकर टेक्स्ट बाहर टेक्स्ट होता है या वह शब्द होते हैं जिन पर आप क्लिक कर सकते हैं| यह ज्यादातर वेब ब्राउज़र में नीले रंग से दिखता है| आप इन पर जब भी अपना माउस लाएंगे तो आप इन पर क्लिक कर पाएंगे| एक उदाहरण ले तो यह लिंक वायरल पत्रिका के होम पेज पर जाता है| इसमें “वायरल पत्रिका के होम पेज” एक एंकर टेक्स्ट है|

इसका कोड कुछ ऐसा दीखता है  <a href=”http://www.viralpatrika.com”>वायरल पत्रिका के होम पेज</a>

एंकर टेक्स्ट दोनों सर्च इंजन और यूजर्स को एक लिंक के बारे में ज्यादा जानकारी देता है|एक एंकर टेक्स्ट जितना वर्णात्मक होगा उतना ही अच्छा होगा क्योंकि वह सर्च इंजन और यूजर को ज्यादा अच्छी जानकारी दे पाएगा|

ऑन-डा-पेज सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन – II

This article is a part of Digital Marketing in Hindi series on Viral Patrika. This covers details of on-the-page Search Engine Optimization in Hindi. This is the second part of On-The-Page S.E.O. The first part of basics of On-The-Page Search Engine Optimization in Hindi introduces the concept. This part will explain it in further detail.

नमस्कार। आपका ऑन -डा -पेज सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के दुसरे अध्याय में स्वागत है। ऑन – डा -पेज याने की आपके वेबपेज पर होने वाले अनुकूलन कार्यों में निम्नलिखित महत्वपूर्ण कारक हैं| हमने पहले पाठ में कुछ मूल बातें ऑन द पेज सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन की देखी| इस आर्टिकल में हम ऑन द वे सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के बारे में थोड़ा और विस्तार से चर्चा करेंगे|

1. टाइटल टैग (शीर्षक टैग )

टाइटल टैग वह तत्त्व है जो आपके वेबपेज का टाइटल या शीर्षक बताता है |

टाइटल टैग या शीर्षक टैग सर्च इंजन परिणाम पृष्ठों पर किसी दिए गए परिणाम के लिए क्लिक करने योग्य शीर्षक के रूप में दिखाए जाते हैं। यह टैग एक वेबपेज की प्रयोज्यता, सोशल मीडिआ पर शेयर और सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के लिए महत्वपूर्ण हैं।

नीचे हम दैनिक जागरण के उदहारण के ज़रिये यह समझने की कोशिश करेंगेग की टाइटल टैग का Google सर्च में क्या महत्व है। जो भी नीले रंग में लिखा है (इस उदहारण में दैनिक जागरण ) और जिसे क्लिक किया जा सकता है वह टाइटल टैग में उल्लेखित होता है.

Title Tag - search engine optimization in hindi

Google आमतौर पर शीर्षक टैग के पहले 50-60 वर्ण दिखाता है।यदि आप अपने शीर्षक को 60 अक्षरों से कम रखते हैं, तो हमारा शोध बताता है कि आप अपने शीर्षकों के बारे में 90% से ठीक से प्रदर्शित होने की उम्मीद कर सकते हैं।

यह कोड आखिर दीखता कैसा है ? नीचे इसका एक उदहारण देखते है।

<head>
<title>दैनिक जागरण </title>
</head>

दैनिक जागरण ने निम्नलिखित कोड को अपने HTML में डाल दिया होगा। इसी वजह से उनके सर्च रिजल्ट में नीले रंग में “दैनिक जागरण” लिखा है।

टाइटल टैग क्यों महत्वपूर्ण हैं? टाइटल टैग सर्च इंजन को आपके वेबपेज के बारे में समझने में सहायता करने में एक प्रमुख कारक हैं, और वे आपके वेबपेज के अधिकांश लोगों की पहली छाप हैं। टाइटल टैग तीन प्रमुख स्थानों में उपयोग किया जाता है:

  1. सर्च इंजन परिणाम पृष्ठ (सर्च इंजन रिजल्ट पेज): आपका टाइटल टैग निर्धारित करता है (कुछ अपवादों के साथ) की सर्च इंजन परिणाम पृष्ठ में किसी व्यक्ति का का आपकी साइट से पहला अनुभव कैसा है। यहां तक ​​कि अगर आपकी साइट अच्छी तरह से रैंक करती है, तो एक अच्छा शीर्षक यह निर्धारित करने में मेक-या-ब्रेक फैक्टर हो सकता है – कि कोई व्यक्ति आपके लिंक पर क्लिक करता है या नहीं।
  2. वेब ब्राउज़र : आपका शीर्षक टैग आपके वेब ब्राउज़र के शीर्ष पर प्रदर्शित होता है और प्लेसहोल्डर के रूप में कार्य करता है |एक टाइटल टैग में शुरू में महत्वपूर्ण कीवर्ड (खोजशब्दों) के साथ आप यह सुनिष्चित कर सकते हैं की लोग आपकी साइट को आराम से पहचान पाएं।
  3. सोशल नेटवर्क जैसे फेसबुक और ट्विटर: सोशल नेटवर्क आपके टाइटल टैग का उपयोग यह निर्धारित करने के लिए करेंगे कि जब आप आपका वेबपेज को शेयर किया जाता है तो क्या प्रदर्शित होगा। एक अच्छा टाइटल टैग यह सुनिष्चित करेगा की आपकी वेबसाइट को लोग सोशल मीडिया पर पहचाने और उस पर क्लिक करके आपकी वेबसाइट पर आएं।

2. मेटा विवरण (Meta Description)

मेटा विवरण HTML का वह गुण हैं जो वेबपेज के संक्षिप्त सारांश प्रदान करते हैं। वे आमतौर पर सर्च इंजन परिणाम पृष्ठ में नीले क्लिक करने योग्य लिंक के नीचे दिखाई देते हैं। आइए फिर से दैनिक जागरण का उदाहरण लेते है।

Meta Tag - Digital Marketing in Hindi Series by viral patrika

बॉक्स में दी गई जानकारी आमतौर पर किसी वेब पेज के मेटा टैग में निर्दिष्ट होती है | अब एक HTML में मेटा टैग के कोड को देखें |

<head>
<meta name=”description” content=”यह मेटा टैग का उदहारण है और यहां पे लिखी हुई लाइन सर्च रिजल्ट में दिखती हैं”>
</head>

मेटा विवरण (या डिस्क्रिप्शन) किसी भी लम्बाई हो सकता है, लेकिन सर्च इंजन आमतौर पर 160 अक्षर से अधिक अक्षरों को छोटा करते हैं। मेटा विवरण (या डिस्क्रिप्शन) को लंबे समय तक रखें और अपने वेबपेज का पर्याप्त रूप से विवरण करें, लेकिन 160-वर्ण सीमा से कम।

3. ऑल्ट टैग – Alt Text (वैकल्पिक शब्द)

ऑल्ट टैग या ऑल्ट टेक्स्ट या वैकल्पिक शभ्द एक पृष्ठ (वेबपेज) पर एक इमेज या फोटो (तस्वीर) का वर्णन करने के लिए एक HTML कोड के भीतर उपयोग किया जाता है।

यह आपके वेबपेज पर डाली गयी तस्वीरों का बेहतर विवरण करते हैं। अगर किसी कारन वर्ष आपकी इमेज लोड नहीं हो पाती तो आपकी फोटो की जगह यह शब्द दिखाएं जायेंगे।

सर्च इंजन इमेज सर्च के लिए और आपके वेबसाइट पर बेहतर जानकारी के लिए इनका उपयोग करते हैं। चलो एक उदाहरण लेते हैं इसके HTML कोड का।

<img src=”tastyfood.gif” alt=”स्वादिष्ट भोजन”>

यह ऊपर दिए गए उदहारण में हमने एक इमेज टैग डाला है। इस टैग की वजह से आपके वेबपेज पर एक तस्वीर या फोटो दिखती है। इस उदहारण में यह तस्वीर एक स्वादिश्ट खाने की है। हमने उसके आगे ऑल्ट टैग डालके इस फोटो की ज़यादि जानकारी दी। अब सर्च इंजन को यह पता लग पायेगा की यह तस्वीर एक स्वादिष्ट खाने की है और इस वेबपेज पर स्वादिश्ट खाने के बारे में लिखा हुआ है।

डुप्लीकेट कंटेंट (Duplicate Content)

वह कंटेंट है जो कि इंटरनेट पर एक से ज्यादा जगह पर मौजूद होता है | इस विषय में जगह का तात्पर्य है कि वहकंटेंट एक अलग लिंक पर इंटरनेट पर मौजूद हो| अगर आपकी वेबसाइट पर डुप्लीकेट कंटेंट है या फिर आपने अपनी वेबसाइट या वेब पेज पर किसी और वेबसाइट का कंटेंट उठाया है तो इसका आपकी सर्च इंजन रैंकिंग पर नेगेटिव इंपेक्ट पड़ता है| सर्च इंजन जैसे कि Google एक ही कंटेंट को बार बार अपने सर्च रिजल्ट में शायद ना दिखाएं| गूगल और अन्य सर्च इंजिंस को यह पता करने में भी दिक्कत होती है कि कौन सी वेबसाइट को दिखाया जाए उसी कंटेंट के लिए कौन सी वेबसाइट को नहीं दिखाया जाए| इन्हीं वजहों से आपकी वेबसाइट की लिंक की क्वालिटी कम हो सकती है और यह सर्च रिजल्ट में शायद नीचे है| अगर आपकी वेबसाइट पर कंटेंट कॉपी किया गया है तो इस से आपका शायद नुकसान हो सकता है| s u के लिए जरूरी है कि आपकी वेबसाइट पर अलग और अच्छा कंटेंट मौजूद हो | अगर आपकी अपनी ही वेबसाइट पर कहीं जगह पर वही चीज़ मौजूद है तो बेहतर यह है कि आप डुप्लीकेट कंटेंट को ओरिजिनल कंटेंट की तरफ रीडायरेक्ट करें| इसको 301 डायरेक्ट भी कहते हैं |

डोमेन (Domain)

डोमेन आखिर है क्या और इसका परत सर्च इंजन की रिजल्ट में कैसे पड़ता है?

डोमिन एक अनोखा आराम से पढ़े जाने वाला वेबसाइट का पता होता है|डोमेन आपकी वेबसाइट का पता है| हर वेबसाइट का पता फर्क होता है| इसी वजह से आपकी वेबसाइट का डोमेन नेम बहुत ही महत्वपूर्ण है| गूगल और अन्य सर्च इंजन डोमेन के नाम में दिए गए कीवर्ड्स का इस्तेमाल करता है यह जानकारी प्राप्त करने के लिए किए वेबसाइट किंकी वर्ड के सर्च रिजल्ट में दिखानी चाहिए| इसलिए जब भी आप अपनी वेबसाइट का डोमेन खरीदें तो उसे बड़े ध्यान से खरीदें| उदाहरण लेते हैं एक वेबसाइट जिसका नाम है DelhiKiSaree.com और दूसरी वेबसाइट जिसका नाम है Saree.com| जब भी कोई व्यक्ति दिल्ली की साड़ी सर्च करेगा तो दिल्ली की साड़ी डॉट कॉम का सर्च रिजल्ट में ऊपर आने की संभावना ज्यादा है

इसके 3 हिस्से होते हैं| पहले हिस्से को कहते हैं टॉप लेवल डोमेन यानी चोटी के स्तर का डोमेन| यह डॉट कॉम डॉट इन जैसा दिखता है| दूसरा होता है डोमेन नेम जो कि आसानी से समझ में आने वाला नाम होता है| एक उदाहरण ले तू google.com में डॉट कॉम टॉप लेवल डोमेन है और Google डोमेन नेम है| तीसरा होता है सब डोमेन|

http://news.google.com/
news- सब्डोमैन
Google – डोमेन
.com – टॉप लेवल डोमेन

आपकी वेबसाइट में सबसे जरूरी रुट डोमेन होता है | उदाहरण के तौर पर google.com एक रुप डोमेन है| news.google.com एक सबडोमेन है| सर्च इंजन रूट डोमेन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं|  अपना डोमेन नेम आसान और यादगार बनाई है क्योंकि यह आपकी वेबसाइट का सबसे महत्वपूर्ण अंग है| यह ना ज्यादा लंबा ना छोटा होना चाहिए और कोशिश करिए कि इसमें जबरदस्ती कीवर्ड ना घुसाए जाए|

यूनिफार्म रिसोर्स लोकेटर – URL (Uniform Resource Locator)

वेबसाइट का लिंक या एक वेब पेज का लिंक एक एड्रेस या पता होता है जो हर वेबपेज के लिए अद्वितीय होता है| नीचे हमने कुछ उदाहरण दिए हैं URL के

https://www.jagran.com/
https://www.jagran.com/state/uttar-pradesh
https://www.jagran.com/latest-news.html

यह एक ही डोमेन के अलग-अलग URL है| URL को यूनिफार्म रिसोर्स लोकेटर भी कहते हैं| इसे एक वेब एड्रेस भी कहते हैं| सभी ब्राउज़रों में सही ढंग से प्रस्तुत करने के लिए, URL 2,083 वर्णों से कम होना चाहिए। एक यूआरएल मानव-पठनीय पाठ है, जो कि संख्याओं (आईपी पते) को बदलने के लिए डिज़ाइन किया गया था जो कि कंप्यूटर सर्वरों के साथ संवाद करने के लिए उपयोग करते हैं।

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ऑन पेज सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन – On-The-Page Search Engine Optimization (S.E.O) in Hindi

Learn basics of On-The-Page Search Engine Optimization (S.E.O) in Hindi.

ऑन पेज सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन एक तकनीक है जिस से आप एक वेबपेज को को सर्च इंजन के के अनुकूल बनाते हैं। वेबसाइट पर आपका दिया हुआ कंटेंट और उसका HTML याने की उसका कोड दोनो को सर्च इंजन के अनुकूल बनाया जा सकता है।

सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन में अब हम देखेंगे कि आप अपने वेब साइट के कोर्ट में क्या-क्या कर सकते हैं जिससे आप अपनी वेबसाइट को सर्च इंजन के अनुकूल बना सकते हैं।

सबसे पहले आता है कंटेंट। कंटेंट जाने की आपके वेब पेज पर क्या लिखा हुआ है वही उसको एक सर्च इंजन के रिजल्ट में आने के योग्य बनाता है। अगर कोई यूजर आगे आपकी वेब पेज पर दिया गया कंटेंट पड़ता है और जो वह पढ़ता है वह उसे पसंद आता है तो इससे सर्च इंजिंस को यह पता लगता है कि आपकी वेबसाइट पर कुछ अच्छा लिखा गया है और यह सच रिजल्ट में ऊपर आने की ज्यादा योग्य है। सर्च इंजन और सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के नजरिए से देखा जाए तो अच्छे कंटेंट के 2 गुण होते हैं। पहला गुण यह है कि एक अच्छा कंटेंट एक डिमांड की आपूर्ति करता है। यह विश्व की स्टॉक मार्केट की तरह भी है। अब मान लीजिए आप एक वेबसाईट चलाते हैं जिसमें आप बेहतर स्वास्थ्य के बारे में लिखते हैं। इस कंटेंट की डिमांड है क्योंकि ज्यादा लोग यह जानना चाहते हैं कि बेहतर स्वास्थ्य कैसे पाया जाए। यही आप दूसरा कंटेंट देखें जिसमें कोई यह बताता है कि आप बिल्डिंग से किस तरह से कूद सकते हैं ।इस कंटेंट की कम डिमांड होगी या ना के बराबर डिमांड होगी।

कंटेंट लिंक केबल होता है मतलब की ज्यादा वेबसाइट्स अच्छे कंटेंट के अच्छे आर्टिकल्स पर लिंक करती हैं। अगर दूसरी वेबसाइट्स आपकी वेबसाइट पर दिए गए कंटेंट का रिफरेंस या लिंक नहीं करती हैं तो शायद सर्च इंजन आपकी वेबसाइट या वेब पेज को ज्यादा ऊपर रैंक ना करें।

यह ऑन द पेज सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन की कुछ मूल बातें हैं इसके आगे हम विस्तार से चर्चा करेंगे की ऑन द प्लीज सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन में क्या क्या आता है।

सरल भाषा में ऑन द पेज सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन वह चीज है जो आप अपनी वेबसाइट या वेब पेज पर कर सकते हैं जिससे आपकी वेबसाइट है वेब पेज सर्च इंजन के अनुकूल बने। संक्षेप में देखा जाए तो इसके दो मूलगुण है। पहला गुण है आपके कंटेंट या आर्टिकल या वेबसाइट पर दी गई सूची की गुणवत्ता या क्वालिटी। दूसरा कौन है आपकी वेबसाइट पर दिया गया कोड जो सर्च इंजन को ही है सूची अच्छी तरह दे पाता है।

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Google सर्च काम कैसे करता है? दूसरा अध्याय

नमस्कार आपका वायरल पत्रिका में फिर से स्वागत है। पिछले पोस्ट में हमने कुछ मूल बातों की चर्चा करी गूगल सर्च के बारे में। हमने यह जाना कि google अपने स्पाइडर या कॉलर के जरिए पूरे इंटरनेट के बारे में जानकारी अपने में सम्मिलित करता है। यह स्पाइडर या क्रॉलर गूगल का एक इंडेक्स सूची बनाते हैं जिसमें गूगल को हर वेबसाइट के बारे में पूरी जानकारी होती है। उसको ना सिर्फ यह जानकारी होती है की वेबसाइट किस बारे में है पर यह भी जानकारी होती है कि और कौन कौन सी वेबसाइट से पूछ वेबसाइट पर लिंक कर रही है। इस जानकारी से गूगल यह तय करता है कि उस वेबसाइट को किन सर्च रिजल्ट में दिखाएं। अगर आप अपनी वेबसाइट के बारे में सही जानकारी गूगल को बताएंगे तो आपकी वेबसाइट भी Google के सर्च रिजल्ट में ऊपर आ सकती है। Google पर हर सेकंड 63 हजार से ऊपर सर्च होती है। इन सर्च इसमें Google आप के बिजनेस के बारे में आप के ग्राहकों को अच्छी जानकारी दे सकता है। मान लीजिए कि आप दिल्ली में साड़ियों का धंधा करते हैं और आपकी एक दुकान है साड़ियों की चांदनी चौक में। अगर आपने एक वेबसाइट बनाई है अपने बिजनेस के बारे में और उसमें यह जानकारी दे रखी है कि आप साड़ियां भेजते हैं आपने इसके अलावा किस तरह की साड़ियां भेजते हैं किन नामों पर बेचते हैं यह सारी जानकारी डाल रखी है और अपना पता डाल रखा है तो जब भी कोई गूगल पर यह सर्च करेगा कि उसको साड़ियां खरीदनी है दिल्ली में तो Google आप की वेबसाइट का रिजल्ट उसको दिखाइएगा।

इससे आपका साड़ियों का व्यापार बढ़ जाएगा। यह तय करने के लिए कि आपकी वेबसाइट ऑन सर्च रिजल्ट पर ऊपर आए इसके लिए आपको अपनी वेबसाइट Google सर्च के अनुकूल बनानी पड़ेगी। इन्हीं कारणों की वजह से सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन सीखना और उसका जानना जरूरी है। इस जानकारी को अच्छी तरह से समझने के लिए यह जानना भी बहुत जरूरी है कि Google सर्च काम कैसे करता है। इसी विषय पर हम इस पोस्ट में और विस्तार से चर्चा करेंगे।

हर सर्च क्वेरी के लिए हजारों लाखों या अरबों वेबसाइट हो सकती है। आपने यह सोचा है कि Google यह कैसे तय कर सकता है कि कौन सी वेबसाइट उसके सर्च रिजल्ट पर ऊपर आनी चाहिए और कौन सी वेबसाइट उसके साथ रिजल्ट को नीचे आनी चाहिए?

Google यह तय करने के लिए एक बहुत ही कॉन्प्लेक्स एल्गोरिदम का इस्तेमाल करता है जो साल में 500 से 600 बार अपडेट हो सकता है। पर आपको कुछ मूल बातें गूगल सर्च के बारे में जाननी जरूरी है जिसका प्रयोग गूगल करता है यह तय करने के लिए कि आपकी वेबसाइट सर्च में कितनी ऊपर आएगी और किन सर्च क्वेरी के लिए ऊपर आएगी।

इसमें सबसे पहले आता है आपकी वेबसाइट पर दिया गया कंटेंट या आपकी वेबसाइट पर दी गई सूची। यह सूची जितनी अच्छी तरह दी गई होगी या जितनी विस्तार से दी गई होगी वह यह तय करेगा Google को बताने में कि उस वेबसाइट पर क्या सूची है और वह सूची कितनी अच्छी है। अगर आपने अपनी वेबसाइट पर साड़ियों की सूची दी हुई है पर यह सूची विस्तार से नहीं है तो शायद Google आपकी वेबसाइट की सूची को ज्यादा अच्छा रैंक ना करें।

दूसरे नंबर पर आता है कि कितनी वेबसाइट्स आपकी वेबसाइट स्कोर लिंक कर रही है। इसको आसान तरीके से समझने के लिए एक नक्शे का उदाहरण लेते हैं। मान लीजिए आप की राज्य में विधानसभा है ‌ विधानसभा एक महत्वपूर्ण जगह है। इसकी वजह से आप यह देखेंगे कि काफी सड़के विधानसभा की दिशा में जा रही होंगी और नक्शे में भी काफी रास्तों में विधानसभा की तरफ दिशा दिखाई गई होगी। यही अगर कोई कम महत्वपूर्ण जगह है तो उसकी तरफ कम सड़के जा रही होंगी और नक्शे में भी कम जगह उसकी दिशा दिखाई गई होगी। गूगल भी वेबसाइट के साथ कुछ ऐसा ही करता है। अगर आपकी वेबसाइट की तरफ काफी वेबसाइट से लिंक बैंक कर रहे हैं तो Google यह समझता है कि आपकी वेबसाइट महत्वपूर्ण वेबसाइट है। यही अगर आपकी वेबसाइट की तरफ कम देख साइट्स लिंक कर रही हैं तो Google को लगेगा कि आपकी वेबसाइट इतनी महत्वपूर्ण नहीं है ‌। इसी से आता है ऑफ द पेज सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन याने कि आप अपनी वेबसाइट के अलावा अन्य क्या चीज है करते हैं जिससे आपकी वेबसाइट Google सर्च या अन्य सर्च इंजन के अनुकूल बनती है।

गूगल यह गूगल यह भी देखता है कि आपकी वेबसाइट पर क्या क्या लिखा हुआ है। कोई उदाहरण दे तो अगर आपने अपनी वेबसाइट साड़ियों के बारे में बना रखी है और आपने इस वेबसाइट पर साड़ियों के बारे में अच्छी तरह से लिखा हुआ है तो Google आप को ज्यादा अंक देगा। Google यह भी देखता है कि आपकी वेबसाइट पर जो लोग आ रहे हैं वह कितना समय बता रहे है। इसे Google कोई अंदाजा लगता है कि आपकी वेबसाइट पर दिया गया कंटेंट कितना अच्छा है। अगर लोग आप की वेबसाइट पर आकर ज्यादा समय बिता रहे हैं तो Google आपकी वेबसाइट को अपने सर्च रिजल्ट में ज़्यादा ऊपर शायद दिखाएगा। इस सब जानकारियों को पता करने के लिए Google कुछ टैग्स का इस्तेमाल करता है। अगर आपने अपनी वेबसाइट गूगल के दिए गए नियमों के मुताबिक बनाई है तो Google आप की वेबसाइट को बेहतर जान पाएगा। अगर Google आपकी वेबसाइट को बेहतर जानता होगा तो वह यह ज्यादा अच्छी तरह से तय कर पाएगा कि आपकी वेबसाइट को सर्च रिजल्ट में कहां पर दिखाना है और किन-किन कीवर्ड्स में दिखाना है। इन्हीं कारणों की वजह से आपको अपनी वेबसाइट Google के दिए गए नियमों के मुताबिक बनाना जरूरी है। इसको ऑन द पेज सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन भी कहते हैं। इसका मतलब यह है कि आप अपनी वेबसाइट या अपने वेब पेज पर जो जो चीजें करते हैं जिससे आपकी वेबसाइट Google या अन्य सर्च इंजन के अनुकूल बनती है।

ऑन द बीच और ऑफ द प्लीज सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के बारे में हम आगे जाकर और विस्तार से चर्चा करेंगे। हम यह जानेंगे कि ऑन द पेज सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन कैसे किया जाता है और आफ्टर पर सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन कैसे किया जाता है।

आशा करते हैं कि आप को अब ज्यादा जानकारी होगी Google सर्च के बारे में।

अगर आपने किसी कारणवश गूगल सर्च काम कैसे करता है का पहला अध्याय मिस कर दिया है तो आप नीचे दिए गए लिंक पर जाकर उसको पढ़ सकते हैं.

गूगल सर्च काम कैसे करता है – पहला अध्याय