लिंक बिल्डिंग – Link Building

नमस्कार| आपका डिजिटल मार्केटिंग की हिंदी सीरीज में फिर से स्वागत है| In this post learn more about link building in Hindi. This post is a part of Digital marketing in Hindi series by Viral Patrika.

लिंक बिल्डिंग सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन का एक बहुत ही महत्वपूर्ण अंग है और यह ऑफ-साइट सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन में आता है|

लिंक्स सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है| इस पोस्ट में हम चर्चा करेंगे लिंक बिल्डिंग के बारे में| सरल भाषा में लिंक बिल्डिंग अपने वेबसाइट के लिंक बनाने का तरीका है जिससे आपकी वेबसाइट गूगल सर्च या अन्य सर्च इंजनों के अनुकूल बनेगी| इसमें दो तरह के लिंक आते हैं
पहला है इंटरनल जाने की वह लिंक जो आपकी वेबसाइट पर मौजूद होते हैं और आपकी वेबसाइट पर अन्य व्यक्ति जिस की तरफ इशारा करते हैं| दूसरे होते हैं एक्सटर्नल जो कि आपकी वेबसाइट पर किसी दूसरी वेबसाइट की ओर इशारा करते हैं|

इंटरनेट लिंक (Internal Link) – इंटरनल लिंक्स ऐसे लिंक होते हैं जो एक डोमेन पर एक पेज से एक ही डोमेन पर किसी अन्य पेज पर जाते हैं। वे आमतौर पर मुख्य नेविगेशन में उपयोग किया जाता है।

नीचे हमने एक उदाहरण दिया है इंटरनल लिंक का| जो लिंक मुख्य नेविगेशन में लाल रंग से दिखाए गए हैं वह लिंक viralpatrika.com पर ही एक अन्य पेज खोलते हैं| क्योंकि यह पेज आप को viralpatrika.com पर ही रखते हैं, इसी वजह से इनको इंटरनल लिंक बोलते हैं|

Internal Links - Digital Marketing in hindi series.

इंटरनल लिंग के 3 फायदे होते हैं

  • वे उपयोगकर्ताओं को एक वेबसाइट पर नेविगेट करने की अनुमति देते हैं |
  • वे दिए गए वेबसाइट के लिए सूचना पदानुक्रम को स्थापित करने में सहायता करते हैं।
  • वे वेबसाइटों के आसपास लिंक का रस (रैंकिंग पावर) फैलाने में मदद करते हैं

एक्सटर्नल लिंक (External Link) – एक्सटर्नल लिंक वह लिंक होते हैं जो आपके डोमेन के अलावा किसी और डोमेन पर यूजर को भेजते हैं| मान लीजिए की वायरल patrika.com पर हमने दैनिक jagran.com का एक लिंक दिया तो उसे एक्सटर्नल लिंक कहेंगे| यह लिंक एक यूजर को आपकी वेबसाइट के बाहर ले जाते हैं| ऐसे ही अन्य वेबसाइट पर अगर आपकी वेबसाइट का लिंक होगा तो वह और अन्य वेब साइट्स के लिए एक्सटर्नल लिंक है और आप के लिए बैक लिंक है|

सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन विशेषज्ञों का मानना ​​है कि बाहरी लिंक रैंकिंग शक्ति का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत हैं
यह इंटरनल लिंक से भी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है किसी भी वेब पेज के लिए| अगर कोई प्रभावशाली वेबसाइट आपकी वेबसाइट को एक एक्सटर्नल लिंक देती है तो इससे आपकी वेबसाइट को सर्च इंजन रिजल्ट में ऊपर आने में बहुत फायदा होगा| सर्च इंजन इन को एक वोट की तरह भी मानते हैं| अगर ज्यादा व्यक्ति आप को वोट देंगे तो आपकी सर्च इंजन में रैंक बढ़ेगी| सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के नजरिए से देखा जाए तो ज्यादा वोट का मतलब है कि ज्यादा बैक लिंक | तो अगर ज्यादा वेबसाइट आप को वोट देती हैं या फिर ज्यादा महत्वपूर्ण वेबसाइट आपको वोट देती है ( जाने के बैकलिंक देती है) इस से आपकी वेबसाइट सर्च इंजन के रिजल्ट में ऊपर आएगी| इससे आप की वेबसाइट Google पर आने वाले हजारों लोगों के सर्च किए गए कीवर्ड के सर्च रिजल्ट में ऊपर आएगी इसका मतलब है आप की वेबसाइट पर ज्यादा से ज्यादा ट्रैफिक फ्री में आएगा|
आपको अपनी वेबसाइट के लिए लिंक बनाते रहना जरूरी है| जो लिंक एक समय पर लोकप्रिय या पॉपुलर थे मैं अब इतने ताज़ा ना हो| इसी वजह से शायद कम लोग उन लिंक पर क्लिक करके आपकी वेबसाइट पर आएं| इसी वजह से एक्सटर्नल लिंक समय-समय पर बनाते रहना बहुत जरूरी है|

एंकर टेक्स्ट (Anchor text) – एंकर टेक्स्ट बाहर टेक्स्ट होता है या वह शब्द होते हैं जिन पर आप क्लिक कर सकते हैं| यह ज्यादातर वेब ब्राउज़र में नीले रंग से दिखता है| आप इन पर जब भी अपना माउस लाएंगे तो आप इन पर क्लिक कर पाएंगे| एक उदाहरण ले तो यह लिंक वायरल पत्रिका के होम पेज पर जाता है| इसमें “वायरल पत्रिका के होम पेज” एक एंकर टेक्स्ट है|

इसका कोड कुछ ऐसा दीखता है  <a href=”http://www.viralpatrika.com”>वायरल पत्रिका के होम पेज</a>

एंकर टेक्स्ट दोनों सर्च इंजन और यूजर्स को एक लिंक के बारे में ज्यादा जानकारी देता है|एक एंकर टेक्स्ट जितना वर्णात्मक होगा उतना ही अच्छा होगा क्योंकि वह सर्च इंजन और यूजर को ज्यादा अच्छी जानकारी दे पाएगा|

ऑफ-साइट सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन

Off-Site (Or Off-The-Page Search Engine Optimization) in Hindi. This is a part of Digital Marketing in Hindi Series.

ऑफ-साइट सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन – सर्च इंजन परिणामों के पृष्ठों में अपनी रैंकिंग को प्रभावित करने के लिए अपनी स्वयं की वेबसाइट के बाहर की गई सभी प्रथाओं को ऑफ – साइट या ऑफ डा पेज (यानेकी अपने वेबपेज के अलावा ) ऑप्टिमाइजेशन कहते हैं।

ऑफ द पेज या ऑफ साइट सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के बारे में ज्यादा चर्चा करने से पहले एक बार फिर से जान लेते हैं कि सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन होता क्या है|  अगर सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन को आसान शब्दों में समझा जाए तो सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन का मतलब है कि आप अपनी वेबसाइट वीडियो या मोबाइल एप्लीकेशन को सर्च इंजन के अनुकूल बना रहे हैं। सर्च इंजन में विश्व का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण सर्च इंजन है Google। अगर आप चाहते हैं कि आपकी वेबसाइट भी गूगल की सेवाओं का फायदा उठा है और उसकी सर्च मैं ऊपर आए तो आपके लिए सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन जानना बहुत ही आवश्यक है।

ऑफ़-साइट ऑप्टिमाइजेशन में अपने वेबसाइट साइट की लोकप्रियता, प्रासंगिकता, विश्वसनीयता और प्राधिकरण की उपयोगकर्ता धारणा में सुधार करना शामिल है।

यह इंटरनेट पर अन्य सम्मानित स्थानों या वेबसाइट , वेबपेज आदि द्वारा आपकी वेबसाइट की गुणवत्ता को जोड़ने या बढ़ावा देने, और आपके कंटेंट की गुणवत्ता के लिए प्रभावी रूप से समर्थन देने के ज़रिये किया जाता है।

ऑफ-साइट सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन क्यों ज़रूरी है ?

अध्ययनों से पता चलता है कि ऑफ़-साइट ऑप्टिमाइजेशन का एक वेबसाइट की सर्च इंजन रैंकिंग में 50% से अधिक का योगदान होता है।

बैंक लिंक बनाना (Building back-links)

ऑफ पेज सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन मैं सबसे जरूरी चीज है दूसरी वेबसाइट से अपनी वेब लिंक लाना | इसे बैंक लिंक बिल्डिंग भी कहते हैं| सरल रूप से ग्राम इसको जानने की कोशिश करें तो इसका मतलब है कि दूसरी वेबसाइट से आपकी वेबसाइट पर एक हाइपरलिंक आए| अगर कोई लोकप्रिय वेबसाइट आपकी वेबसाइट को एक लिंक कर रही है तो इससे Google या अन्य सर्च इंजन को यह लगता है कि आपकी वेबसाइट भी अच्छी है और आपकी वेबसाइट पर दिया गया कंटेंट भी अच्छी क्वालिटी का है|

एक उदाहरण लेते हैं| मान लीजिए कि आप की वेबसाइट मोबाइल फोन के बारे में एक राय प्रस्तुत करती है| यही मान लीजिए कि नवभारत टाइम्स अपने एक पोस्ट में या अपने एक लेख में आप की वेबसाइट का जिक्र करती है और आपकी वेबसाइट को लिंक करती है तो इससे Google या अन्य सर्च इंजन को यह संकेत जाएगा कि आपकी वेबसाइट भी एक विश्वसनीय वेबसाइट है|

बैंक लिंक तीन प्रकार से बनाए जा सकते हैं |

  1. पहला होता है नेचुरल लिंक बिल्डिंग – यह बिना कुछ किए सिर्फ अच्छी क्वालिटी का कंटेंट क्या लिख लिख कर अपनी वेबसाइट पर दूसरी वेबसाइट से लिंक करवाने का तरीका है| अगर आपकी वेबसाइट या वेब पेज पर अच्छे गुणवत्ता वाले लेख होंगे तो दूसरी वेबसाइट जिनमें प्रभावशाली वेबसाइट से भी हो सकती है आपकी वेबसाइट या वेब पेज के संदर्भ में अपने लेख शॉपिंग| इसमें आपको कुछ नहीं करना होता सेवाएं अच्छी क्वालिटी के लेख लिखने के सिवा| इस तरीके में थोड़ा वक़्त जरूर लगता है|
  2. इसमें दूसरा आता है मैनुअल लिंक बिल्डिंग| इस तरीके में आप अपने वेबसाइट के विजिटर्स को या फिर प्रभावशाली व्यक्ति या वेबसाइट को अपने वेबसाइट का लिंक शेयर करने के लिए बोलते हैं| इसके लिए आप उनकी वेबसाइट को रेफर कर सकते हैं या फिर उनकी वेबसाइट पर जाकर कमेंट कर सकते हैं या फिर इन प्रभावशाली वेबसाइट या व्यक्तियों से मिलकर उनको अपनी वेबसाइट की जानकारी शेयर करने के लिए बोल सकते हैं|
  3. लिंक बिल्डिंग में तीसरा और आखरी तरीका है सेल्फ क्रिएटेड लिंक्स ( या स्व-निर्मित लिंक्स) के जरिए | यह सबसे आसान और काफी महत्वपूर्ण तरीका है| इसमें आप अपनी वेबसाइट का लिंक अपने सोशल मीडिया चैनल या फिर अन्य बिजनेस डायरेक्ट्री डाल सकते हैं| मान लीजिए कि आपका एक ब्लॉग है जिसमें आप अपनी फैशन संबंधी राय देते हैं| तो आप ब्लॉक की ऑनलाइन जितनी भी डायरेक्टर्स है वहां पर अपने ब्लॉग का लिंक शेयर कर सकते हैं| इससे आपको काफी महत्वपूर्ण बैठ लिंक्स शुरू में आसानी से मिल जाएंगे| अगर आप एक व्यापारी है तो आप अपनी बिजनेस वेबसाइट को अन्य बिजनेस डायरेक्ट्री में शेयर कर सकते हैं| भारत में देखा जाए तो आप अपनी वेबसाइट का लिंक जस्ट डायल जैसी वेबसाइट्स पर डाल सकते हैं|

 

ऑन-डा-पेज सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन – II

This article is a part of Digital Marketing in Hindi series on Viral Patrika. This covers details of on-the-page Search Engine Optimization in Hindi. This is the second part of On-The-Page S.E.O. The first part of basics of On-The-Page Search Engine Optimization in Hindi introduces the concept. This part will explain it in further detail.

नमस्कार। आपका ऑन -डा -पेज सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के दुसरे अध्याय में स्वागत है। ऑन – डा -पेज याने की आपके वेबपेज पर होने वाले अनुकूलन कार्यों में निम्नलिखित महत्वपूर्ण कारक हैं| हमने पहले पाठ में कुछ मूल बातें ऑन द पेज सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन की देखी| इस आर्टिकल में हम ऑन द वे सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के बारे में थोड़ा और विस्तार से चर्चा करेंगे|

1. टाइटल टैग (शीर्षक टैग )

टाइटल टैग वह तत्त्व है जो आपके वेबपेज का टाइटल या शीर्षक बताता है |

टाइटल टैग या शीर्षक टैग सर्च इंजन परिणाम पृष्ठों पर किसी दिए गए परिणाम के लिए क्लिक करने योग्य शीर्षक के रूप में दिखाए जाते हैं। यह टैग एक वेबपेज की प्रयोज्यता, सोशल मीडिआ पर शेयर और सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के लिए महत्वपूर्ण हैं।

नीचे हम दैनिक जागरण के उदहारण के ज़रिये यह समझने की कोशिश करेंगेग की टाइटल टैग का Google सर्च में क्या महत्व है। जो भी नीले रंग में लिखा है (इस उदहारण में दैनिक जागरण ) और जिसे क्लिक किया जा सकता है वह टाइटल टैग में उल्लेखित होता है.

Title Tag - search engine optimization in hindi

Google आमतौर पर शीर्षक टैग के पहले 50-60 वर्ण दिखाता है।यदि आप अपने शीर्षक को 60 अक्षरों से कम रखते हैं, तो हमारा शोध बताता है कि आप अपने शीर्षकों के बारे में 90% से ठीक से प्रदर्शित होने की उम्मीद कर सकते हैं।

यह कोड आखिर दीखता कैसा है ? नीचे इसका एक उदहारण देखते है।

<head>
<title>दैनिक जागरण </title>
</head>

दैनिक जागरण ने निम्नलिखित कोड को अपने HTML में डाल दिया होगा। इसी वजह से उनके सर्च रिजल्ट में नीले रंग में “दैनिक जागरण” लिखा है।

टाइटल टैग क्यों महत्वपूर्ण हैं? टाइटल टैग सर्च इंजन को आपके वेबपेज के बारे में समझने में सहायता करने में एक प्रमुख कारक हैं, और वे आपके वेबपेज के अधिकांश लोगों की पहली छाप हैं। टाइटल टैग तीन प्रमुख स्थानों में उपयोग किया जाता है:

  1. सर्च इंजन परिणाम पृष्ठ (सर्च इंजन रिजल्ट पेज): आपका टाइटल टैग निर्धारित करता है (कुछ अपवादों के साथ) की सर्च इंजन परिणाम पृष्ठ में किसी व्यक्ति का का आपकी साइट से पहला अनुभव कैसा है। यहां तक ​​कि अगर आपकी साइट अच्छी तरह से रैंक करती है, तो एक अच्छा शीर्षक यह निर्धारित करने में मेक-या-ब्रेक फैक्टर हो सकता है – कि कोई व्यक्ति आपके लिंक पर क्लिक करता है या नहीं।
  2. वेब ब्राउज़र : आपका शीर्षक टैग आपके वेब ब्राउज़र के शीर्ष पर प्रदर्शित होता है और प्लेसहोल्डर के रूप में कार्य करता है |एक टाइटल टैग में शुरू में महत्वपूर्ण कीवर्ड (खोजशब्दों) के साथ आप यह सुनिष्चित कर सकते हैं की लोग आपकी साइट को आराम से पहचान पाएं।
  3. सोशल नेटवर्क जैसे फेसबुक और ट्विटर: सोशल नेटवर्क आपके टाइटल टैग का उपयोग यह निर्धारित करने के लिए करेंगे कि जब आप आपका वेबपेज को शेयर किया जाता है तो क्या प्रदर्शित होगा। एक अच्छा टाइटल टैग यह सुनिष्चित करेगा की आपकी वेबसाइट को लोग सोशल मीडिया पर पहचाने और उस पर क्लिक करके आपकी वेबसाइट पर आएं।

2. मेटा विवरण (Meta Description)

मेटा विवरण HTML का वह गुण हैं जो वेबपेज के संक्षिप्त सारांश प्रदान करते हैं। वे आमतौर पर सर्च इंजन परिणाम पृष्ठ में नीले क्लिक करने योग्य लिंक के नीचे दिखाई देते हैं। आइए फिर से दैनिक जागरण का उदाहरण लेते है।

Meta Tag - Digital Marketing in Hindi Series by viral patrika

बॉक्स में दी गई जानकारी आमतौर पर किसी वेब पेज के मेटा टैग में निर्दिष्ट होती है | अब एक HTML में मेटा टैग के कोड को देखें |

<head>
<meta name=”description” content=”यह मेटा टैग का उदहारण है और यहां पे लिखी हुई लाइन सर्च रिजल्ट में दिखती हैं”>
</head>

मेटा विवरण (या डिस्क्रिप्शन) किसी भी लम्बाई हो सकता है, लेकिन सर्च इंजन आमतौर पर 160 अक्षर से अधिक अक्षरों को छोटा करते हैं। मेटा विवरण (या डिस्क्रिप्शन) को लंबे समय तक रखें और अपने वेबपेज का पर्याप्त रूप से विवरण करें, लेकिन 160-वर्ण सीमा से कम।

3. ऑल्ट टैग – Alt Text (वैकल्पिक शब्द)

ऑल्ट टैग या ऑल्ट टेक्स्ट या वैकल्पिक शभ्द एक पृष्ठ (वेबपेज) पर एक इमेज या फोटो (तस्वीर) का वर्णन करने के लिए एक HTML कोड के भीतर उपयोग किया जाता है।

यह आपके वेबपेज पर डाली गयी तस्वीरों का बेहतर विवरण करते हैं। अगर किसी कारन वर्ष आपकी इमेज लोड नहीं हो पाती तो आपकी फोटो की जगह यह शब्द दिखाएं जायेंगे।

सर्च इंजन इमेज सर्च के लिए और आपके वेबसाइट पर बेहतर जानकारी के लिए इनका उपयोग करते हैं। चलो एक उदाहरण लेते हैं इसके HTML कोड का।

<img src=”tastyfood.gif” alt=”स्वादिष्ट भोजन”>

यह ऊपर दिए गए उदहारण में हमने एक इमेज टैग डाला है। इस टैग की वजह से आपके वेबपेज पर एक तस्वीर या फोटो दिखती है। इस उदहारण में यह तस्वीर एक स्वादिश्ट खाने की है। हमने उसके आगे ऑल्ट टैग डालके इस फोटो की ज़यादि जानकारी दी। अब सर्च इंजन को यह पता लग पायेगा की यह तस्वीर एक स्वादिष्ट खाने की है और इस वेबपेज पर स्वादिश्ट खाने के बारे में लिखा हुआ है।

डुप्लीकेट कंटेंट (Duplicate Content)

वह कंटेंट है जो कि इंटरनेट पर एक से ज्यादा जगह पर मौजूद होता है | इस विषय में जगह का तात्पर्य है कि वहकंटेंट एक अलग लिंक पर इंटरनेट पर मौजूद हो| अगर आपकी वेबसाइट पर डुप्लीकेट कंटेंट है या फिर आपने अपनी वेबसाइट या वेब पेज पर किसी और वेबसाइट का कंटेंट उठाया है तो इसका आपकी सर्च इंजन रैंकिंग पर नेगेटिव इंपेक्ट पड़ता है| सर्च इंजन जैसे कि Google एक ही कंटेंट को बार बार अपने सर्च रिजल्ट में शायद ना दिखाएं| गूगल और अन्य सर्च इंजिंस को यह पता करने में भी दिक्कत होती है कि कौन सी वेबसाइट को दिखाया जाए उसी कंटेंट के लिए कौन सी वेबसाइट को नहीं दिखाया जाए| इन्हीं वजहों से आपकी वेबसाइट की लिंक की क्वालिटी कम हो सकती है और यह सर्च रिजल्ट में शायद नीचे है| अगर आपकी वेबसाइट पर कंटेंट कॉपी किया गया है तो इस से आपका शायद नुकसान हो सकता है| s u के लिए जरूरी है कि आपकी वेबसाइट पर अलग और अच्छा कंटेंट मौजूद हो | अगर आपकी अपनी ही वेबसाइट पर कहीं जगह पर वही चीज़ मौजूद है तो बेहतर यह है कि आप डुप्लीकेट कंटेंट को ओरिजिनल कंटेंट की तरफ रीडायरेक्ट करें| इसको 301 डायरेक्ट भी कहते हैं |

डोमेन (Domain)

डोमेन आखिर है क्या और इसका परत सर्च इंजन की रिजल्ट में कैसे पड़ता है?

डोमिन एक अनोखा आराम से पढ़े जाने वाला वेबसाइट का पता होता है|डोमेन आपकी वेबसाइट का पता है| हर वेबसाइट का पता फर्क होता है| इसी वजह से आपकी वेबसाइट का डोमेन नेम बहुत ही महत्वपूर्ण है| गूगल और अन्य सर्च इंजन डोमेन के नाम में दिए गए कीवर्ड्स का इस्तेमाल करता है यह जानकारी प्राप्त करने के लिए किए वेबसाइट किंकी वर्ड के सर्च रिजल्ट में दिखानी चाहिए| इसलिए जब भी आप अपनी वेबसाइट का डोमेन खरीदें तो उसे बड़े ध्यान से खरीदें| उदाहरण लेते हैं एक वेबसाइट जिसका नाम है DelhiKiSaree.com और दूसरी वेबसाइट जिसका नाम है Saree.com| जब भी कोई व्यक्ति दिल्ली की साड़ी सर्च करेगा तो दिल्ली की साड़ी डॉट कॉम का सर्च रिजल्ट में ऊपर आने की संभावना ज्यादा है

इसके 3 हिस्से होते हैं| पहले हिस्से को कहते हैं टॉप लेवल डोमेन यानी चोटी के स्तर का डोमेन| यह डॉट कॉम डॉट इन जैसा दिखता है| दूसरा होता है डोमेन नेम जो कि आसानी से समझ में आने वाला नाम होता है| एक उदाहरण ले तू google.com में डॉट कॉम टॉप लेवल डोमेन है और Google डोमेन नेम है| तीसरा होता है सब डोमेन|

http://news.google.com/
news- सब्डोमैन
Google – डोमेन
.com – टॉप लेवल डोमेन

आपकी वेबसाइट में सबसे जरूरी रुट डोमेन होता है | उदाहरण के तौर पर google.com एक रुप डोमेन है| news.google.com एक सबडोमेन है| सर्च इंजन रूट डोमेन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं|  अपना डोमेन नेम आसान और यादगार बनाई है क्योंकि यह आपकी वेबसाइट का सबसे महत्वपूर्ण अंग है| यह ना ज्यादा लंबा ना छोटा होना चाहिए और कोशिश करिए कि इसमें जबरदस्ती कीवर्ड ना घुसाए जाए|

यूनिफार्म रिसोर्स लोकेटर – URL (Uniform Resource Locator)

वेबसाइट का लिंक या एक वेब पेज का लिंक एक एड्रेस या पता होता है जो हर वेबपेज के लिए अद्वितीय होता है| नीचे हमने कुछ उदाहरण दिए हैं URL के

https://www.jagran.com/
https://www.jagran.com/state/uttar-pradesh
https://www.jagran.com/latest-news.html

यह एक ही डोमेन के अलग-अलग URL है| URL को यूनिफार्म रिसोर्स लोकेटर भी कहते हैं| इसे एक वेब एड्रेस भी कहते हैं| सभी ब्राउज़रों में सही ढंग से प्रस्तुत करने के लिए, URL 2,083 वर्णों से कम होना चाहिए। एक यूआरएल मानव-पठनीय पाठ है, जो कि संख्याओं (आईपी पते) को बदलने के लिए डिज़ाइन किया गया था जो कि कंप्यूटर सर्वरों के साथ संवाद करने के लिए उपयोग करते हैं।

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ऑन पेज सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन – On-The-Page Search Engine Optimization (S.E.O) in Hindi

Learn basics of On-The-Page Search Engine Optimization (S.E.O) in Hindi.

ऑन पेज सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन एक तकनीक है जिस से आप एक वेबपेज को को सर्च इंजन के के अनुकूल बनाते हैं। वेबसाइट पर आपका दिया हुआ कंटेंट और उसका HTML याने की उसका कोड दोनो को सर्च इंजन के अनुकूल बनाया जा सकता है।

सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन में अब हम देखेंगे कि आप अपने वेब साइट के कोर्ट में क्या-क्या कर सकते हैं जिससे आप अपनी वेबसाइट को सर्च इंजन के अनुकूल बना सकते हैं।

सबसे पहले आता है कंटेंट। कंटेंट जाने की आपके वेब पेज पर क्या लिखा हुआ है वही उसको एक सर्च इंजन के रिजल्ट में आने के योग्य बनाता है। अगर कोई यूजर आगे आपकी वेब पेज पर दिया गया कंटेंट पड़ता है और जो वह पढ़ता है वह उसे पसंद आता है तो इससे सर्च इंजिंस को यह पता लगता है कि आपकी वेबसाइट पर कुछ अच्छा लिखा गया है और यह सच रिजल्ट में ऊपर आने की ज्यादा योग्य है। सर्च इंजन और सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के नजरिए से देखा जाए तो अच्छे कंटेंट के 2 गुण होते हैं। पहला गुण यह है कि एक अच्छा कंटेंट एक डिमांड की आपूर्ति करता है। यह विश्व की स्टॉक मार्केट की तरह भी है। अब मान लीजिए आप एक वेबसाईट चलाते हैं जिसमें आप बेहतर स्वास्थ्य के बारे में लिखते हैं। इस कंटेंट की डिमांड है क्योंकि ज्यादा लोग यह जानना चाहते हैं कि बेहतर स्वास्थ्य कैसे पाया जाए। यही आप दूसरा कंटेंट देखें जिसमें कोई यह बताता है कि आप बिल्डिंग से किस तरह से कूद सकते हैं ।इस कंटेंट की कम डिमांड होगी या ना के बराबर डिमांड होगी।

कंटेंट लिंक केबल होता है मतलब की ज्यादा वेबसाइट्स अच्छे कंटेंट के अच्छे आर्टिकल्स पर लिंक करती हैं। अगर दूसरी वेबसाइट्स आपकी वेबसाइट पर दिए गए कंटेंट का रिफरेंस या लिंक नहीं करती हैं तो शायद सर्च इंजन आपकी वेबसाइट या वेब पेज को ज्यादा ऊपर रैंक ना करें।

यह ऑन द पेज सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन की कुछ मूल बातें हैं इसके आगे हम विस्तार से चर्चा करेंगे की ऑन द प्लीज सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन में क्या क्या आता है।

सरल भाषा में ऑन द पेज सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन वह चीज है जो आप अपनी वेबसाइट या वेब पेज पर कर सकते हैं जिससे आपकी वेबसाइट है वेब पेज सर्च इंजन के अनुकूल बने। संक्षेप में देखा जाए तो इसके दो मूलगुण है। पहला गुण है आपके कंटेंट या आर्टिकल या वेबसाइट पर दी गई सूची की गुणवत्ता या क्वालिटी। दूसरा कौन है आपकी वेबसाइट पर दिया गया कोड जो सर्च इंजन को ही है सूची अच्छी तरह दे पाता है।

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Google सर्च काम कैसे करता है? दूसरा अध्याय

नमस्कार आपका वायरल पत्रिका में फिर से स्वागत है। पिछले पोस्ट में हमने कुछ मूल बातों की चर्चा करी गूगल सर्च के बारे में। हमने यह जाना कि google अपने स्पाइडर या कॉलर के जरिए पूरे इंटरनेट के बारे में जानकारी अपने में सम्मिलित करता है। यह स्पाइडर या क्रॉलर गूगल का एक इंडेक्स सूची बनाते हैं जिसमें गूगल को हर वेबसाइट के बारे में पूरी जानकारी होती है। उसको ना सिर्फ यह जानकारी होती है की वेबसाइट किस बारे में है पर यह भी जानकारी होती है कि और कौन कौन सी वेबसाइट से पूछ वेबसाइट पर लिंक कर रही है। इस जानकारी से गूगल यह तय करता है कि उस वेबसाइट को किन सर्च रिजल्ट में दिखाएं। अगर आप अपनी वेबसाइट के बारे में सही जानकारी गूगल को बताएंगे तो आपकी वेबसाइट भी Google के सर्च रिजल्ट में ऊपर आ सकती है। Google पर हर सेकंड 63 हजार से ऊपर सर्च होती है। इन सर्च इसमें Google आप के बिजनेस के बारे में आप के ग्राहकों को अच्छी जानकारी दे सकता है। मान लीजिए कि आप दिल्ली में साड़ियों का धंधा करते हैं और आपकी एक दुकान है साड़ियों की चांदनी चौक में। अगर आपने एक वेबसाइट बनाई है अपने बिजनेस के बारे में और उसमें यह जानकारी दे रखी है कि आप साड़ियां भेजते हैं आपने इसके अलावा किस तरह की साड़ियां भेजते हैं किन नामों पर बेचते हैं यह सारी जानकारी डाल रखी है और अपना पता डाल रखा है तो जब भी कोई गूगल पर यह सर्च करेगा कि उसको साड़ियां खरीदनी है दिल्ली में तो Google आप की वेबसाइट का रिजल्ट उसको दिखाइएगा।

इससे आपका साड़ियों का व्यापार बढ़ जाएगा। यह तय करने के लिए कि आपकी वेबसाइट ऑन सर्च रिजल्ट पर ऊपर आए इसके लिए आपको अपनी वेबसाइट Google सर्च के अनुकूल बनानी पड़ेगी। इन्हीं कारणों की वजह से सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन सीखना और उसका जानना जरूरी है। इस जानकारी को अच्छी तरह से समझने के लिए यह जानना भी बहुत जरूरी है कि Google सर्च काम कैसे करता है। इसी विषय पर हम इस पोस्ट में और विस्तार से चर्चा करेंगे।

हर सर्च क्वेरी के लिए हजारों लाखों या अरबों वेबसाइट हो सकती है। आपने यह सोचा है कि Google यह कैसे तय कर सकता है कि कौन सी वेबसाइट उसके सर्च रिजल्ट पर ऊपर आनी चाहिए और कौन सी वेबसाइट उसके साथ रिजल्ट को नीचे आनी चाहिए?

Google यह तय करने के लिए एक बहुत ही कॉन्प्लेक्स एल्गोरिदम का इस्तेमाल करता है जो साल में 500 से 600 बार अपडेट हो सकता है। पर आपको कुछ मूल बातें गूगल सर्च के बारे में जाननी जरूरी है जिसका प्रयोग गूगल करता है यह तय करने के लिए कि आपकी वेबसाइट सर्च में कितनी ऊपर आएगी और किन सर्च क्वेरी के लिए ऊपर आएगी।

इसमें सबसे पहले आता है आपकी वेबसाइट पर दिया गया कंटेंट या आपकी वेबसाइट पर दी गई सूची। यह सूची जितनी अच्छी तरह दी गई होगी या जितनी विस्तार से दी गई होगी वह यह तय करेगा Google को बताने में कि उस वेबसाइट पर क्या सूची है और वह सूची कितनी अच्छी है। अगर आपने अपनी वेबसाइट पर साड़ियों की सूची दी हुई है पर यह सूची विस्तार से नहीं है तो शायद Google आपकी वेबसाइट की सूची को ज्यादा अच्छा रैंक ना करें।

दूसरे नंबर पर आता है कि कितनी वेबसाइट्स आपकी वेबसाइट स्कोर लिंक कर रही है। इसको आसान तरीके से समझने के लिए एक नक्शे का उदाहरण लेते हैं। मान लीजिए आप की राज्य में विधानसभा है ‌ विधानसभा एक महत्वपूर्ण जगह है। इसकी वजह से आप यह देखेंगे कि काफी सड़के विधानसभा की दिशा में जा रही होंगी और नक्शे में भी काफी रास्तों में विधानसभा की तरफ दिशा दिखाई गई होगी। यही अगर कोई कम महत्वपूर्ण जगह है तो उसकी तरफ कम सड़के जा रही होंगी और नक्शे में भी कम जगह उसकी दिशा दिखाई गई होगी। गूगल भी वेबसाइट के साथ कुछ ऐसा ही करता है। अगर आपकी वेबसाइट की तरफ काफी वेबसाइट से लिंक बैंक कर रहे हैं तो Google यह समझता है कि आपकी वेबसाइट महत्वपूर्ण वेबसाइट है। यही अगर आपकी वेबसाइट की तरफ कम देख साइट्स लिंक कर रही हैं तो Google को लगेगा कि आपकी वेबसाइट इतनी महत्वपूर्ण नहीं है ‌। इसी से आता है ऑफ द पेज सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन याने कि आप अपनी वेबसाइट के अलावा अन्य क्या चीज है करते हैं जिससे आपकी वेबसाइट Google सर्च या अन्य सर्च इंजन के अनुकूल बनती है।

गूगल यह गूगल यह भी देखता है कि आपकी वेबसाइट पर क्या क्या लिखा हुआ है। कोई उदाहरण दे तो अगर आपने अपनी वेबसाइट साड़ियों के बारे में बना रखी है और आपने इस वेबसाइट पर साड़ियों के बारे में अच्छी तरह से लिखा हुआ है तो Google आप को ज्यादा अंक देगा। Google यह भी देखता है कि आपकी वेबसाइट पर जो लोग आ रहे हैं वह कितना समय बता रहे है। इसे Google कोई अंदाजा लगता है कि आपकी वेबसाइट पर दिया गया कंटेंट कितना अच्छा है। अगर लोग आप की वेबसाइट पर आकर ज्यादा समय बिता रहे हैं तो Google आपकी वेबसाइट को अपने सर्च रिजल्ट में ज़्यादा ऊपर शायद दिखाएगा। इस सब जानकारियों को पता करने के लिए Google कुछ टैग्स का इस्तेमाल करता है। अगर आपने अपनी वेबसाइट गूगल के दिए गए नियमों के मुताबिक बनाई है तो Google आप की वेबसाइट को बेहतर जान पाएगा। अगर Google आपकी वेबसाइट को बेहतर जानता होगा तो वह यह ज्यादा अच्छी तरह से तय कर पाएगा कि आपकी वेबसाइट को सर्च रिजल्ट में कहां पर दिखाना है और किन-किन कीवर्ड्स में दिखाना है। इन्हीं कारणों की वजह से आपको अपनी वेबसाइट Google के दिए गए नियमों के मुताबिक बनाना जरूरी है। इसको ऑन द पेज सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन भी कहते हैं। इसका मतलब यह है कि आप अपनी वेबसाइट या अपने वेब पेज पर जो जो चीजें करते हैं जिससे आपकी वेबसाइट Google या अन्य सर्च इंजन के अनुकूल बनती है।

ऑन द बीच और ऑफ द प्लीज सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के बारे में हम आगे जाकर और विस्तार से चर्चा करेंगे। हम यह जानेंगे कि ऑन द पेज सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन कैसे किया जाता है और आफ्टर पर सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन कैसे किया जाता है।

आशा करते हैं कि आप को अब ज्यादा जानकारी होगी Google सर्च के बारे में।

अगर आपने किसी कारणवश गूगल सर्च काम कैसे करता है का पहला अध्याय मिस कर दिया है तो आप नीचे दिए गए लिंक पर जाकर उसको पढ़ सकते हैं.

गूगल सर्च काम कैसे करता है – पहला अध्याय

Google सर्च काम कैसे करता है?

How does Google search and online search work in Hindi?

इस पोस्ट में हम यह जानेंगे कि गूगल का सर्च आखिर काम कैसे करता है। अगर आप सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के विषय में अच्छी तरह से जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो यह समझना आवश्यक है कि विश्व का सबसे बड़ा ऑनलाइन सर्च इंजन गूगल काम कैसे करता है।

इस पोस्ट में हम इसके बारे में एक सरल पर विस्तार चर्चा करेंगे। कभी आपने यह सोचा है कि Google जैसी वेबसाइट आपको चंद सेकंडों से कम समय में आपके सवाल का जवाब कैसे दे पाती है? या फिर आपने यह सोचने की कोशिश करी है कि Google आपको चंद सेकेंडों में विश्व की सारी खबरें कैसे दे पाती है?

इन सवालों के जवाब हम इस पोस्ट के जरिए देने की कोशिश करेंगे। अगर आपको यह समझ में आ गया कि Google जैसा विशालकाय सर्च इंजन काम कैसे करता है तो आपको यह जानने में दिक्कत नहीं होगी कि आप अपनी वेबसाइट को सर्च इंजन के अनुकूल कैसे बना सकते हैं।

तो Google आखिर करता क्या है? आसान शब्दों में अगर यह देखा जाए तो Google सारी दुनिया में जितनी भी वेबसाइट से उन वेबसाइट्स को लगातार अपने सिस्टम पर डाउनलोड करता है। वह इन वेब साइट्स को पूरी तरह ना डाउनलोड करके उनके बारे में जरूरी जानकारी अपने पास रख लेता है। इन वेबसाइट्स की एक सूचि या फिर एक इंडेक्स बनाता है। इस इंडेक्स में वह उस वेबसाइट की सारी जानकारी जैसे कि वह किस तरह की वेबसाइट है उस वेबसाइट पर क्या-क्या लिखा गया है किस विषयों के बारे में लिखा गया है ऐसी काफी जानकारी इकट्ठी करता है। यह जानकारी उस वेबसाइट पर दी गई जानकारी होती है। इसके अलावा Google और भी बहुत सारी जानकारी उस वेबसाइट के बारे में पता करता है। अब मान लीजिए कि आपने एक नई वेबसाइट बनाई है तो गूगल को यह कैसे पता लगेगा कि उसको आपकी वेबसाइट पर आना है और इस जानकारी को अपने पास सम्मिलित करना है?

इस जानकारी को पता करने के लिए Google अपने क्रॉलर का इस्तेमाल करता है। यह क्रॉलर वेबसाइट को विजिट करते हैं और उन वेबसाइट से यह पता लगाते हैं कि और कौन कौन सी वेबसाइट है जिन पर वह जा सकते हैं। तो मान लीजिए कि एक वेबसाइट है viralpatrika.com। इस वेबसाइट पर अन्य वेब साइट्स के लिंक है। तुझे Google वायरल patrika.com पर अपने क्रॉलर भेजिएगा और वायरल patrika.com की जानकारी अपने में सम्मिलित करेगा तो Google यह भी पता लगाएगा की और कौन कौन सी वेबसाइट है जो की वायरल patrika.com से जुड़ी हुई है। अगर Google को यह जानकारी मिलती है कि तीन और वेबसाइट्स मान लीजिए डिजिटल डॉट कॉम भी वायरल patrika.com सीलिंग है तू Google उसके बाद जाकर डिजिटल डॉट कॉम पर अपने क्रॉलर भेजेगा। ऐसे ही वह और भी जितनी वेबसाइट सिया लिंक्स वायरल patrika.com पर हैं उन पर जाकर अपने क्रॉलर भेजेगा और वहां की सारी जानकारी डाउनलोड करेगा। तो इसी तरह से अगर आपकी वेबसाइट नहीं है और उस वेबसाइट का लिंक कहीं पर नहीं है तो Google को शायद यह पता ही ना लग पाए कि आपकी वेबसाइट पर उसके क्रॉलर को जाना है। जब हम सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन की चर्चा विस्तार से करेंगे तब हम यह जानेंगे कि आप अपनी वेबसाइट को गूगल पर सबमिट कैसे कर सकते हैं। अगर आप की नई वेबसाइट है तो आपको Google वालों को यह सूचित करना होगा कि वह आपकी वेबसाइट की भी जानकारी अपने पास डाउनलोड करें।

जब Google आपकी वेबसाइट की जानकारी की सूची बना रहा होता है तो Google यह भी देखता है कि आपकी वेबसाइट अन्य कितनी वेबसाइट स्कूल लिंक कर रही हैं। इसके अलावा गूगल को यह भी पता लगता है कि अन्य कितनी वेबसाइट आपकी वेबसाइट को लिंक कर रही हैं। इससे उसको यह अंदाजा लगता है कि आपकी वेबसाइट कितनी महत्वपूर्ण है। तो अगर ज्यादा वेबसाइट आपकी वेबसाइट को लिंक कर रही हैं तो इसका मतलब यह है कि आपकी वेबसाइट ज्यादा महत्वपूर्ण है।

मान लीजिए आप की वेबसाइट को 10 अन्य वेबसाइट लिंक कर रही हैं इसका मतलब यह है कि यह अन्य वेबसाइट कहीं ना कहीं आपके बारे में चर्चा कर रही हैं और आपकी वेबसाइट पर जा रही हैं। यही अगर 10 की जगह 100 वेबसाइट आपकी वेबसाइट को एक लिंक दे रही है तो इसका मतलब यह वेबसाइट पिछली वेबसाइट से ज्यादा महत्वपूर्ण है। यह इतना आसान भी नहीं है पर अगर आप Google के बारे में मूल जानकारी पाना चाहते हैं तो इतना समझना जरूरी है कि अगर ज्यादा वेबसाइट आपकी वेबसाइट को एक लिंक दे रही है तो इसका मतलब यह है कि Google आपकी वेबसाइट को ज्यादा महत्वपूर्ण समझता है।

Google यह भी जानने की कोशिश करता है कि किन विषयों पर यह वेबसाइट आपकी वेबसाइट को लिंक कर रही हैं और आपकी वेबसाइट किन विषयों के बारे में है। मान लीजिए आप की वेबसाइट योगा के बारे में है और आपकी वेबसाइट को 10 अन्य वेबसाइट जो की योगा के बारे में सूची देती हैं वह भी लिंक कर रही है तो Google आपकी वेबसाइट को एक रैंक देगा। यही अगर आपकी वेबसाइट योगा के बारे में है और 10 फनी वेबसाइट आपकी वेबसाइट को एक लिंक दे रही हैं पर इस बार वह योगा में नहीं पर समाचार में है तो शायद Google आपको कम रैंक दे क्योंकि यह जो 10 अन्य वेबसाइट्स है यह शायद योगा के ऊपर नहीं है। इस उदाहरण में हमने योगा को एक कीवर्ड माना है। कीवर्ड वह शब्द होता है जो लोग Google में सर्च करते वक्त डालते हैं

तो अगर आपने डिजिटल मार्केटिंग सर्च किया है Google पर तो डिजिटल मार्केटिंग एक कीवर्ड है।

पिछली उदाहरण में अगर हम देखें तो यू का कीबोर्ड पर जो पहली वेबसाइट है जिसको 10 अन्य वेबसाइट लिंक दे रही है जो कि योगा के बारे में ही लिखती हैं, Google उसको ज्यादा अच्छी रैंक देगा।

इसी तरह से Google और भी अन्य चीजें आपकी वेबसाइट के बारे में देखता है। Google को यह भी पता लगता है कि आपकी वेबसाइट धीरे चलती है या तेज चलती है लोग अगर आपकी वेबसाइट पर आते हैं तो कितना समय बिताते हैं और इसके अलावा अन्य हजारों चीजें आपकी वेबसाइट के बारे में देखता है यह जानने के लिए कि आपकी वेबसाइट किन विषयों पर या किन कीवर्ड्स पर ऊपर आनी चाहिए। इसे करने से Google यह सुनिश्चित करता है कि सही वेबसाइट सही कीवर्ड्स पर आए और जो वेबसाइट ज्यादा महत्वपूर्ण है वह एक यूजर को ज्यादा ऊपर दिखे।

तो यहां तक हमने यह जाना है कि Google अपने सर्च रिजल्ट्स का इंडेक्स कैसे बनाता है।

अब आप यह सोच रहे होंगे कि पूरे विश्व में अरबों वेबसाइट्स है तो Google यह काम हर वक्त कैसे कर पाता है? यह काम Google के लिए भी बहुत मुश्किल है और जैसे-जैसे नहीं वेबसाइट से बनती जा रही हैं Google को भी यह देखना पड़ता है कि वह वेब साइट्स पर अपने क्रॉलर कब का भेजें और उनकी सूची कैसे बनाएं। इसको करने के लिए Google एक बहुत ही आसान सा तरीका अपनाता है। Google को यह पता है कि कौन सी वेबसाइट है जो रोज कुछ नया लिखती है या कुछ नया बताती हैं। यह ज्यादातर समाचार संबंधी वेबसाइट सो सकती हैं या फिर यह वह वेबसाइट सो सकती हैं जिन पर दुनिया भर के काफी सारे लोग रोज आते हैं। जिंदल साइट्स पर कम लोग आते हैं उन वेबसाइट स्कोर Google ज्यादा देर के बाद अपने सिस्टम में अपडेट करता है। तो अगर आप की वेबसाइट पर ज्यादा लोग आते हैं तो Google ज्यादा बार कमबख्त में आपकी वेबसाइट पर अपने क्रॉलर भेज कर अपनी सूची को अपडेट करेगा।

हम आगे गूगल सर्च के बारे में और विस्तार से चर्चा करेंगे। आगे बढ़ने से पहले आपको कुछ चीजों से और कुछ नाम और उनके मतलब से परिचित होना पड़ेगा।

कीवर्ड: यह वह शब्द है जो यूजर Google में टाइप करता है सर्च करने के लिए।

क्रॉलर: एक इंटरनेट क्रॉलर को स्पाइडर भी बोलते हैं। एक रोलर 1 वॉट है याने कि अपने आप चलने वाला एक कोड जोकि पुरे इंटरनेट को अपने आप विजिट करता है। इसका काम इंटरनेट की एक सूची बनाना है।

सर्च इंजन रिजल्ट पेज: यह वह वापिस है जिस पर आपको अपने सर्च किए गए शब्द के सारे रिजल्ट मिलते हैं।

सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन की मूल बातें – Search Engine Optimization in Hindi

Learn the basics of Search Engine Optimisation in Hindi.

इस पोस्ट में हम चर्चा करेंगे सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के बारे में। अगर सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन को आसान शब्दों में समझा जाए तो सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन का मतलब है कि आप अपनी वेबसाइट वीडियो या मोबाइल एप्लीकेशन को सर्च इंजन के अनुकूल बना रहे हैं।

सर्च इंजन में विश्व का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण सर्च इंजन है Google। आपने खुद गूगल का इस्तेमाल किया होगा किसी चीज के बारे में सर्च करने के लिए।

अगर आप चाहते हैं कि आपकी वेबसाइट भी गूगल की सेवाओं का फायदा उठा है और उसकी सर्च मैं ऊपर आए तो आपके लिए सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन जानना बहुत ही आवश्यक है।

विश्व में करीब करीब 80% सर्च ट्रैफिक Google से आता है। Google के बाद सबसे बड़ा सर्च इंजन है बिंग।

Google पर हर सेकंड पूरे विश्व में 63 हजार से ऊपर सर्च होती है। इसमें से ज्यादातर सर्च एक मोबाइल डिवाइस पर होती है। ऐसा देखा गया है कि जो उपभोक्ता एक स्थानीय जगह के बारे में Google पर सर्च करते हैं उनमें से 72 प्रतिशत लोग स्थानीय जगह का दौरा कर कर आते हैं अगर वह जगह 5 मील के अंदर है।

यह भी देखा गया है की 78% स्थानीय सर्च की वजह से एक दुकान में सेल होती है। यह भी देखा गया है कि 51 प्रतिशत स्मार्टफोन यूज़र ने एक नई कंपनी प्रोडक्ट के बारे में पता किया अपने स्मार्टफोन पर सर्च करके।

अगर आपकी वेबसाइट Google के सर्च रिजल्ट में पहले नंबर पर आती है तो आपको उस शख्स पर कम से कम 34% क्लिक मिलेंगे और यह भी बिना किसी खर्चे के। इसी वजह से जो विश्व की सबसे बड़ी कंपनियां है वह सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन याने कि अपनी वेबसाइट को सर्च के अनुकूल बनाने के लिए बड़ी-बड़ी टीमों का और आधुनिक तकनीकों का प्रयोग करती है।

तो अगर आप जाना चाहते हैं कि आप भी अपनी वेबसाइट या अपनी कंपनी की वेबसाइट को गूगल के पहले सर्च रिजल्ट में कैसे ला सकते हैं तो आपको सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के बारे में जानना बहुत जरूरी होगा।

सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन को आसान बनाने के लिए गूगल ने काफ़ी तकनीकों की जानकारी दी है जिससे Google को यह पता लगता है कि कौन सी वेबसाइट सर्च पर पहले आने चाहिए और कौन सी वेबसाइट उसके सर्च रिजल्ट पर बाद में आनी चाहिए।

तो आप की वेबसाइट Google की सर्च में कौन सी श्रेणी पर आएगी वह आपकी वेबसाइट किस सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन पर निर्भर है। अगर आपकी वेबसाइट सर्च के परिणामों में नीचे आती है तो इससे आपकी वेबसाइट पर कम लोग आएंगे और आप के बिजनेस या संस्था के बारे में कम लोगों को पता लगेगा। अगर आपका प्रतिस्पर्धा व्यवसाय या कंप्यूटिंग बिजनेस आप से ऊपर आ रहा है Google के सर्च रिजल्ट पर तो उसको ज्यादा फायदा होगा और ज्यादा कस्टमर हो सकता है कि उसके पास जाएं।

सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन की सबसे बड़ी खूबी यह है कि आपको अपनी वेबसाइट पर लोग बिना कोई खर्चा की है मिलते हैं। अगर आपकी वेबसाइट बिजनेस या मोबाइल आपका सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन अच्छा हो रखा है तो इसका यह मतलब है कि कम खर्चे पर आप ज्यादा लोगों तक अपनी बात अपना प्रोडक्ट अपनी सर्विस या अपनी संस्था के बारे में बता सकते हैं।

आज की तारीख में भारत में तकरीबन 95% सर्च Google पर होती है तो इसलिए जब भी हम सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन की बात करेंगे हम Google के बारे में बात करेंगे। इसका महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि 87 प्रतिशत स्मार्टफोन यूज़र सर्च इंजन को कम से कम एक बार इस्तेमाल करते हैं दिन में।

सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन उन सर्च रिजल्ट के बारे में है जो कि आप बिना खर्चा किए Google या अन्य सर्च इंजनों पर लाते हैं। इनको अंड या कमाए हुए रिजल्ट भी कहते हैं।

सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन में तकनीकी और रचनात्मक अंग है। अपनी सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन की पूरी सीरीज में हम इन दोनों के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।

आगे हमें सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन को अच्छी तरह से समझने के लिए यह जानना पड़ेगा कि ऑनलाइन सर्च और गूगल जैसी कंपनियां आखिर चलती कैसे है।

इसकी चर्चा हम विस्तार से करेंगे अपने आगे ब्लॉग पोस्ट में।

डिजिटल मार्केटिंग सीखने के लिए क्या-क्या जानना जरूरी है?

एक बहुत ही अच्छा महत्वपूर्ण सवाल है। जैसा की हमने पहले भी बताया है कि डिजिटल मार्केटिंग एक विशाल विषय है। इस विषय में काफी सारे अन्य पहलू और अन्य विषय आते हैं।

तो अगर आप अभी डिजिटल मार्केटिंग सीखना शुरु कर रहे हैं तो जरूरी है कि आप यह जान ले के डिजिटल मार्केटिंग में क्या क्या आता है।

हमने नीचे आपको एक आसान तरीके से डिजिटल मार्केटिंग में जितने भी विषय आते हैं उनकी जानकारी एक लिस्ट में दी है।

  1. सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन
  2. सर्च इंजन मार्केटिंग
  3. सोशल मीडिया मार्केटिंग
  4. ऑनलाइन रिजर्वेशन मैनेजमेंट
  5. एफिलिएट मार्केटिंग
  6. कॉन्टेंट मार्केटिंग
  7. इन्फ्लुएंस मार्केटिंग
  8. ईमेल मार्केटिंग
  9. SMS मार्केटिंग
  10. डाटा एनालिटिक्स
  11. मोबाइल ऐप मार्केटिंग

यह यह 11 विषय डिजिटल मार्केटिंग के हर पहलू के बारे में आपको बताएगा। अगर आप डिजिटल मार्केटिंग से वाकिफ नहीं है तो इन्हीं पढ़कर घबराइए मत। इस वेबसाइट पर हम हर पहलू के बारे में आपको विस्तार से और आसान तरीके से जानकारी देंगे।

सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन आपको यह सिखाता है कि आप अपनी वेबसाइट गूगल और अन्य सर्च इंजिंस के लिए कैसे बना सकते हैं। अगर आप चाहते हैं कि आपकी वेबसाइट पर लोग गूगल सर्च करके आए तो इसके लिए यह जरूरी होता है कि आपकी वेबसाइट Google के दिए गए नियम और सर्च इंजन की बेस्ट प्रैक्टिसेज सर्वोत्तम प्रथाओं का पालन करें।

सर्च इंजन सर्च इंजन मार्केटिंग को पेपर प्लेट एडवरटाइजिंग भी माना गया है। अगर आप Google पर गए होंगे तो आपने यह देखा होगा कि जब आप कुछ भी सर्च करते हैं तो आपको काफी कंपनियों के ऐड देखते हैं। यह एंड सर्च इंजन के माध्यम उसे और उनके ऐड के प्लेटफार्म से पैसे देकर लाए जाते हैं। सर्च इंजन मार्केटिंग में हमने आपको बताएंगे कि यह आप एक आसान तरीके से कैसे चला सकते हैं। इसमें यह जानना भी जरूरी है कि यह ऐड ना सिर्फ कैसे चलाया जाए पर इनका सदुपयोग कैसे किया जाए जिससे कि कम से कम खर्चे में आप ज्यादा से ज्यादा धंधा अपनी कंपनी के लिए ला पाएं।

सोशल मीडिया मार्केटिंग में आपको यह जानना जरूरी है कि सोशल मीडिया वेबसाइट जैसे फेसबुक ट्विटर इंस्टाग्राम का प्रयोग ज्यादा से ज्यादा लोगों तक कब से कम खर्चे में पहुंचने के लिए कैसे इस्तेमाल करी जा सकती हैं।

एफिलिएट मार्केटिंग मार्केटिंग का एक तरीका है जिसमें आप इंटरनेट पर दूसरों के प्रोडक्ट के सर्विस भेजकर एक कमीशन के थ्रू पैसा बनाते हैं। Amazon देसी बड़ी बड़ी कंपनियां एफिलिएट मार्केटिंग का इस्तेमाल करती हैं ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचने के लिए।

ऑनलाइन प्रिपरेशन मैनेजमेंट सोशल मीडिया मार्केटिंग का ही एक हिस्सा है। ऑनलाइन रेपुटेशन मैनेजमेंट के अंदर आपको यह जानना जरूरी है कि आप अपने फ्रेंड या संस्था की रेपुटेशन सोशल मीडिया और इंटरनेट पर कैसे बनाए रखें। अपने ब्रांड संस्था की प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए यह जरूरी हो गया है आजकल कि आप अपने ब्रांड के बारे में जो भी कहा जा रहा है सोशल मीडिया और अन्य वेबसाइट पर उसको सोने और जहां जरूरी हो उस पर काम करें या फिर उसका सही जवाब दें।

ईमेल और SMS मार्केटिंग में यह सीखना जरूरी है कि आप ईमेल और SMS का प्रयोग कैसे कर सकते हैं अपने प्रोडक्ट सर्वेश या अपने फ्रेंड के बारे में लोगों को सूची देने के लिए। ईमेल और SMS का प्रयोग और भी काफी तरीके से होता है जिसमें कि आप कस्टमर से बात कर पाते हैं और कस्टमर को उसके मुताबिक सूचित कर पाते हैं।

कंटेंट कंटेंट मार्केटिंग में आप कंटेंट जैसे कि आर्टिकल वीडियो या फोटो का प्रयोग करके अपने प्रोडक्ट और सर्विसेज के बारे में लोगों को जानकारी देते हैं। यह एडवरटाइजिंग से थोड़ा हटकर है क्योंकि इसमें आप अपने प्रोडक्ट के सर्विस के बारे में डायरेक्ट अपने कस्टमर को नहीं बताते या उसका प्रचार करते। सीधे तरीके से अपने प्रोडक्ट को ना बेच कर आप अपने कस्टमर को वह कंटेंट देते हैं जो वह पढ़ना चाहता है जिसकी उसको जरूरत है। इसका महत्व इसलिए बढ़ गया है क्योंकि इंटरनेट पर बहुत सारी कंपनियां अपने प्रोडक्ट को संदेश भेज रही है और इस वजह से काफी कस्टमर्स एड्स को नहीं देखते या उनको हटा देते हैं।

इन्फ्लुएंस मार्केटिंग में यही प्रमोशन ऑनलाइल इंफ्लुएंर्स अर्ज जैसे कि ब्लॉगर या फिर सोशल मीडिया पर बड़ी हस्तियों के माध्यम से आप अपनी सीमाओं का प्रचार करते हैं। क्योंकि इन हस्तियों को दुनिया फॉलो करती है इसलिए काफी ब्रांड और संस्थाएं इन प्रभावशाली व्यक्तियों के माध्यम से अपनी बात लोगों को पहुंचाते हैं।

मोबाइल फोंस का इस्तेमाल बढ़ गया है। आपको अब हर इंसान के हाथ में एक स्मार्टफोन मिलेगा जिसमें तरह तरह के मोबाइल ऐप का इस्तेमाल हो रहा होगा। इन एप्स की मार्केटिंग करने के लिए अब एक नया विषय बन गया है जिसको मोबाइल ऑफ मार्केटिंग कहते हैं। मोबाइल ऑफ मार्केटिंग डिजिटल मार्केटिंग में एक नया विषय है जो डिजिटल मार्केटिंग के ही तरीकों का इस्तेमाल करता है। इसका फर्क यह है कि यह मोबाइल ऐप का माध्यम इस्तेमाल करता है।

क्या डिजिटल मार्केटिंग सीखना जरूरी है?

क्या डिजिटल मार्केटिंग और सोशल मीडिया सीखना जरूरी है? यह सवाल हमसे हमारे एक सब्सक्राइबर ने पूछा है तो चलिए जानते हैं कि क्या आज की तारीख में डिजिटल मार्केटिंग और सोशल मीडिया सीखना जरूरी है और अगर है तो इसके फायदे क्या है।

अगर भारत की बात करी जाए और नौकरी करने वालों की बात करी जाए तो डिजिटल मार्केटिंग आज की तारीख में सबसे महत्वपूर्ण स्केल माना गया है।

भारत में दो लाख से ऊपर डिजिटल मार्केटिंग और सोशल मीडिया की नौकरियां हैं। 2020 तक यह अनुमान लगाया गया है कि डिजिटल मार्केटिंग और सोशल मीडिया में 2000000 से ऊपर नौकरियां होगी। तू ही आसानी से कहा जा सकता है कि अगर आप नौकरी कर रहे हैं स्टूडेंट है तो आपके लिए डिजिटल मार्केटिंग सीखना अनिवार्य है।

डिजिटल मार्केटिंग अगर आप सीखते हैं तो यह आसानी से कहा जा सकता है कि आपको आगे जाकर नौकरी की चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। उसका कारण बहुत ही आसान है। इंटरनेट की आवश्यकता हर संस्थान ब्रांड और व्यापारी को है। भारत में बहुत सी ऐसी भारतीय संस्थाएं और भारतीय कंपनियां हैं जो ऐसे लोगों को नौकरियां देना चाहती हैं जिनको डिजिटल मार्केटिंग और सोशल मीडिया की अच्छी समझ हो। यहां तक की बड़ी बड़ी विदेशी कंपनियां जो भारत में काम करती हैं वह भी चाहती हैं कि भारत से ही डिजिटल और सोशल मीडिया प्रोफेशनल को वह अपनी टीम में शामिल करें। इसके बावजूद आज की तारीख में ऐसे कम ही लोग हैं जिनको डिजिटल मार्केटिंग में सोशल मीडिया की अच्छी जानकारी है। तो अगर आप आज से ही डिजिटल मार्केटिंग को पढ़ना शुरू करते हैं और इसकी अच्छी जानकारी लेते हैं तो यह आराम से कहा जा सकता है कि आप को ना सिर्फ नौकरी के आगे जाकर कोई दिक्कत नहीं होगी पर आप खूब तरक्की भी कर सकते हैं।

डिजिटल मार्केटिंग और सोशल मीडिया की जानकारी होने के बाद ना सिर्फ आप एक अच्छी नौकरी कर पाएंगे पर यह भी निश्चित है कि आप की तनखा बाकी लोगों से ज्यादा हो सकती है। आपके पास एक यूनिक एडवांटेज होगा। ऐसा भी देखा गया है कि जो लोग डिजिटल मार्केटिंग और सोशल मीडिया के डोमेन में काम करते हैं उनकी तनख्वाह ज्यादा जल्दी बढ़ती हैं।

हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी भी डिजिटल इंडिया कैंपेन को खूब बढ़ावा दे रहे हैं। यह एक अच्छा लॉन्च पैड बन गया है हर छोटे और बड़े बिजनेस के लिए। एक आई एम आर बी की इंटरनेशनल स्टडी के मुताबिक भारतीय बिजनेस आज की तारीख में 12% खर्चा अपना डिजिटल मार्केटिंग पर करते हैं। इसी वजह से उनको ऐसे लोगों की जरूरत है जो डिजिटल मार्केटिंग और सोशल मीडिया में सशक्त हो।

यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि 2021 तक भारत का ऑनलाइन ट्रैफिक करीबन 296 गुना बढ़ जाएगा 2005 के मुकाबले।

इंडिया में इंटरनेट क पेनेट्रेशन या प्रवेश भी बढ़ रहा है। यह सस्ते दामों पर मिलने वाले स्मार्टफोंस की वजह से हो रहा है। अच्छे स्मार्ट फोन की कीमत दिन पर दिन गिरती जा रही है और 4G जैसे सेवाओं की वजह से हर भारतीय इस देश के हर कोने से इंटरनेट को चला सकता है। इसके लिए कंप्यूटर का होना जरूरी नहीं है। Paytm जैसी सेवाओं इस्तेमाल करके अब हर भारतीय अपने मोबाइल फोन के थ्रू पैसा एक जगह से दूसरी जगह डाल सकता है। नात शरीफ हम पेमेंट मोबाइल के जरिए कर रहे हैं पर मोबाइल फोन पर हम सोशल मीडिया और अन्य सेवाओं का भी प्रयोग कर रहे हैं। आज आपको एक ट्रेन टिकट बुक कराने के लिए रेलवे स्टेशन जाने की जरूरत नहीं है आप IRCTC का ऐप इंस्टॉल कर के एक ट्रेन की टिकट आराम से बुक करा सकते हैं। ऐसे ही मेकमाईट्रिप और रेड बस जैसी सेवाओं का प्रयोग करके आप आराम से हवाई जहाज या बस की टिकट अभी अपने मोबाइल फोन से बुक करा सकते हैं। 130 करोड़ से ऊपर आबादी वाले देश में 2017 तक करीब करीब 40 करोड़ लोग इंटरनेट की सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं।

डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल उनकी डिमांड मार्केट में बहुत बढ़ गई है। इसी वजह से डिजिटल मार्केटिंग और सोशल मीडिया एक आकर्षक कैरियर विकल्प बन गया है। हर बड़ी संस्था यह चाहती है कि उनकी टीम में सशक्त डिजिटल मार्केटिंग और सोशल मीडिया प्रोफेशनल हो जो उनका बिजनेस आगे बढ़ा पाए।

यह ध्यान में पर हम को रखना होगा कि डिजिटल मार्केटिंग एक बहुत ही विशाल विषय है। इसमें सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन सर्च इंजन मार्केटिंग SMS मार्केटिंग ईमेल मार्केटिंग सोशल मीडिया मार्केटिंग कांटेक्ट मार्केटिंग इन्फ्लुएंस मार्केटिंग और वेबसाइट डिजाइनिंग जैसे अन्य विषय आते हैं। घबराइए मत इन विषयों को समझना इतना मुश्किल नहीं है। अगर आपने इनमें से एक भी विषय उठा लिया और उसमें अपनी विशेषज्ञता बढ़ा ली तो आपको आगे नौकरी की कोई दिक्कत नहीं आएगी।

यह डिजिटल मार्केटिंग और सोशल मीडिया का सबसे अच्छा समय है। अगर आप इसको तरीके से पढ़ते हैं और समझते हैं तो आप बहुत ही आराम से अपना कैरियर डिजिटल मार्केटिंग सोशल मीडिया में बना सकते हैं। इसकी सबसे अच्छी बात यह है कि आपको कोई डिग्री की जरूरत नहीं है।

तो निश्चिंत होकर डिजिटल मार्केटिंग और सोशल मीडिया के बारे में पढ़ना और जानना शुरू करिए। आपकी तरक्की को कोई भी नहीं रोक पाएगा।